Saturday, 3 October 2015

मधेशी चाहें मोदी का दखल



BY---ANAND RAI...

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मधेशी चाहें मोदी का दखल

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हाइलाइटर
नेपाल में भारत से जाने वाली खाद्य सामग्री, डीजल, पेट्रोल और घरेलू गैस की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। महाराजगंज जिले के सम्पतिहा से सोनौली तक करीब 16 किलोमीटर तक माल लदे ट्रकों की कतार बन गयी है। नेपाल में पेट्रोल तीन सौ से चार सौ रुपये लीटर बिक रहा है जबकि नेपाली मुद्रा में प्याज दो सौ रुपये किलो बिक रही है।
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-भारत का विरोध बढ़ा पहाड़ के नेपालियों में
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बेलहिया (नेपाल) : नेपाल में नए संविधान के विरोध में मधेशियों के आंदोलन का रंग अब ज्यादा चटख होने लगा है। इस आंदोलन से भारत-नेपाल के व्यापारिक और राजनीतिक रिश्तों में खटास का खतरा भी बढ़ गया है। भारतीयों से रोटी-बेटी का रिश्ता रखने वाले मधेशी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से इस मामले में सीधा हस्तक्षेप चाहते हैं जबकि पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले नेपाली मूल के लोगों को अंदेशा है कि मधेशियों को भारत की ओर से हवा मिल रही है।
 मंगलवार को नेपाल के रुपंदेही जिले की बेलहिया चौकी पर यह नजारा साफ देखने को मिला। मधेशियों का एक जत्था जैसे ही धरने पर बैठा, उन पर ईंट-पत्थर चलने लगा। नो मैंस लैंड के इस पार भारतीय सीमा पर मधेशी और नेपाल सीमा पर पहाडिय़ों के बीच करीब बीस मिनट तक जमकर पथराव हुआ। पहाड़ी मूल के नेपाली भारत के विरोध में नारे भी लगा रहे थे जबकि सोनौली की ओर से जवाबी पत्थर फेंकने में कुछ भारतीयों के भी हाथ शामिल थे। अभी कुछ माह पहले नेपाल की भूकंप त्रासदी में भारत सबसे बड़ा मददगार था। तब सर्वाधिक लाभ पहाड़ी इलाकों में रहने वालों ने ही उठाया। त्रासदी से उबर रहे नेपाल के लिये अमन-चैन की जरूरत है लेकिन नस्लभेद में वहां छिड़ी रार उनके विकास की दुश्मन बन गयी है। हालत यह है कि दोनों देशों की सीमाओं पर आवागमन ठप है। पहाड़ी मूल के अमर थापा मानते हैं कि इसका कुप्रभाव पड़ रहा है। लुंबिनी के सांसद कमलेश्वर पुरी कहते हैं कि संविधान संशोधन नहीं हुआ तो हालात और खराब होंगे। जन जीवन अस्त-व्यस्त हो जायेगा।
पहाड़ी मूल के नेपाली भारत पर इसलिये शक कर रहे हैं क्योंकि मधेशियों का रंग, बोली, भाषा, रहन-सहन और रिवाज भारतीयों से मिलते हैं। इस रंग भेद में पहाड़ और मैदान एक दूसरे के खिलाफ तन गये हैं। शायद इसी भावना के चलते मंगलवार को पहाड़ी नेपालियों ने बेलहिया सीमा पर भारत के विरोध में खूब नारे लगाये। मधेशियों को नेपाल के नये संविधान में सात राज्यों के गठन और नागरिकता के लिये बनाये गये नियम-कानून में खोट नजर आ रहा है। इसी के खिलाफ 51 दिनों से उनका आंदोलन निरंतर तेज हो रहा है। भूकंप की त्रासदी से उबर रहे नेपाल के लिये यह आंदोलन किसी बड़े झटके से कम नहीं है। नेपाल के बुद्धिजीवी वर्ग में इसको लेकर चिंता भी देखी है। नेपाल के वरिष्ठ पत्रकार युवराज घिमिरे कहते हैं कि यह बहुत जटिल मामला है। मधेशियों की कुछ मांग जायज हैं तो कुछ नाजायज क्योंकि उनकी अगुवाई करने वाले सिर्फ सुविधा की राजनीति कर रहे हैं।
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मधेशी मोर्चा लड़ेगा निर्णायक लड़ाई
नए संविधान के खिलाफ नेपाल के तराई इलाकों में सक्रिय राजनीतिक दलों ने मोर्चा बनाकर युद्ध छेड़ दिया है। संघीय लोकतांत्रिक मधेशी मोर्चा के बैनर तले तराई मधेश लोक तांत्रिक पार्टी के अध्यक्ष महंथ ठाकुर, उपाध्यक्ष हृदयेश त्रिपाठी, संघीय समाजवादी फोरम नेपाल के अध्यक्ष उपेन्द्र यादव, सद्भावना पार्टी के राजेन्द्र महतो और तराई मधेश सद्भावना पार्टी के महेन्द्र राय यादव इस लड़ाई की अगुवाई कर रहे हैं। नेपाल के पूर्व मंत्री हृदयेश त्रिपाठी और मोर्चा संयोजक महेन्द्र यादव कहते हैं कि मोदी जी को इसमें हस्तक्षेप कर संविधान में परिवर्तन के लिये सीधी पहल करनी चाहिये। उनका कहना है कि हम संविधान में बदलाव तक अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।
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मधेशी साम्राज्य 22 जिलों में
नेपाल में तराई के 22 जिलों में मधेशियों का साम्राज्य फैला है। झापा, मोरंग, सुनसारी, परसा, इटहरी, सप्तरी, सिरहा, रौतहट, मोहतरी, धनुषा, बारा, सरलाही, चितवन, नवलपरासी, रुपंदेही, दांग, बांके, बरदिया, कंचनपुर और कैलाली जिलों में रहने वाले सांवले रंग और बिल्कुल भारतीयों की तरह दिखने वालों को मधेशी कहते हैं। नेपाल की करीब पौने तीन करोड़ आबादी में 37 फीसद हिस्सेदारी मधेशियों की है।
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भारतीयों का प्रवेश मुश्किल
आंदोलन का असर यह है कि नेपाल में भारतीयों के प्रवेश पर पहाडिय़ों की ओर से हाथापाई की जा रही है और उनके भारत आने पर इस ओर भी यही हाल है। आंदोलन की चक्की में कारोबारी पिस रहे हैं। दोनों तरफ से आवागमन ठप है। सिर्फ सोनौली बार्डर से प्रतिदिन करीब तीन सौ ट्रक खाद्य सामग्री, डीजल-पेट्रोल और घरेलू गैस आदि लेकर नेपाल जाते थे। हिमाचल प्रदेश से सेबों का ट्रक लेकर चले मुहम्मद नाजिर और शिमला के राजकुमार परेशान हैं। सात दिन में उनका सेब पानी छोडऩे लगा है। इन्हें कोई उपाय नहीं दिख रहा है। आगरा के रामतेज ट्रक मे आलू और राम सकल प्याज लेकर सात दिनों से पड़े हैं। चेन्नई, हरियाणा, दिल्ली समेत कई राज्यों के कारोबारी, ट्रक चालक और कर्मचारी भूख-प्यास से छटपटा रहे हैं पर उनका कोई पुरसाहाल नहीं है।

---- इनसेट ----
--गांधी की राह पर मधेसी
नए संविधान में वजूद बरकरार रखने के लिए आंदोलित मधेसी अब महात्मा गांधी की राह पकड़ेंगे। गांधी जयंती पर 12 लाख से अधिक मधेसी करीब 1155 किलोमीटर लम्बी मानव श्रंखला बनाकर अपने हक की आवाज सत्याग्रही अंदाज में बुलंद करेंगे।  संघीय लोकतांत्रिक मधेसी मोर्चा ने विरोध का अङ्क्षहसक रास्ता अपनाते हुए तराई क्षेत्र के 22 जिलों में गांधीगिरी का संदेश देना शुरू किया है। नेपाल सरकार के पूर्व मंत्री हृदयेश त्रिपाठी का दावा है कि झापा से महाकाली तक बनने वाली मानव श्रंखला में 37 प्रतिशत मधेसियों का प्रतिनिधित्व रहेगा।
गत 51 दिनों से पनपे संविधान विरोधी आंदोलन में तराई क्षेत्र के 22 जिलों का माहौल गर्माया हुआ है। मधेसियों की घनी आबादी वाले झापा, कंचनपुर, कैडलाली, सुनसरी, मोरांग, परसा, ईटहरी, तिरहा, बारा, धनुषा, चितवन, रोहताश, मोहतरही, सरलाई, रूपनदेही, ढांग, बांके, सैलाली व नवल पतसई आदि जिलों में प्रचार- प्रसार जोर पकड़े है।
 
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30.09.2015
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पिपरहवो हमार, नौतनवों हमार
नोट- स्टोरी के साथ प्रयोग के लिए लोगो 30यूपीडी-जी1 में जारी किया गया है।
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-नेपाल में बदल रहे रिश्तों के समीकरण
-चीन के प्रति मधेशियों में भड़क रहा गुस्सा
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पिपरहवा (नेपाल) : नेपाल के नए संविधान के विरोध में जारी मधेशी आंदोलन से रिश्तों के समीकरण बदल रहे हैं। पहाड़ में रहने वाले नेपालियों का झुकाव चीन की तरफ बढ़ रहा है जबकि तराई में बसने वाले मधेशी भारतीयों से गांठ मजबूत करने लगे हैं। इस कारण नेपाल दो हिस्सों में बंटा दिख रहा है। स्वाभाविक है तीनों देशों पर इसका सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक प्रभाव पडऩा तय है।
 नेपाल के रुपनदेही जिले के करीब 130 घरों वाले मधेशी बहुल पिपरहवा गांव के लोगों ने जबसे सुना कि भारत से बहू लाने पर सात साल के इंतजार के बाद उसे नेपाल की नागरिकता मिलेगी, तबसे उनका गुस्सा भड़क गया है। गांव के कक्षा आठ तक पढ़े नगेसर और गोरखनाथ कुर्मी कहते हैं कि हमारे रोटी-बेटी के रिश्तों पर अंकुश लगाने के लिए नागरिकता का नया नियम चीन की साजिश से बनाया गया है। पिपरहवा और आस-पास के गांवों के हर घर में भारतीय परिवारों के बेटे-बेटियों की शादी हुई है। साठ साल पहले नौतनवां के पास के एक गांव से ब्याह कर पिपरहवा गयीं भूला देवी नागरिकता की बात तो नहीं समझतीं लेकिन बड़े दम से कहती हैं कि 'पिपरहवो हमार, नौतनवों हमारÓ। असल में जब भूला का ब्याह हुआ तो उन्हें नेपाल और भारत की जगह सिर्फ इतना पता था कि मायके से कोस भर की दूरी पर ससुराल है, लेकिन बदले हालात में दोनों देशों की दूरी उन्हें समझ में आ गयी है। इसी गांव में 12 वर्ष पहले ब्याही गयी महराजगंज की शर्मिला कहती हैं कि अगर भारत से रिश्तेदारी के लिए नियम कानून बनेंगे तो चल नहीं पायेंगे।
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  अगड़ों-पिछड़ों की दूरी कम मधेशी बहुल गांवों में निरक्षर भी नियम कानूनों के प्रभाव-दुष्प्रभाव से वाकिफ होने लगे हैं। पिपरहवा से एक मील के हेरफेर में ठरका, भिलरहवा, बैरिहवां, ठरकी, हड़सरी और नौडिहवा जैसे गांवों में कुर्मी, धोबी, मुसलमान, अनुसूचित जाति, यादव, ब्राह्मण और कुछ क्षत्रिय बसे हैं। कुछ वर्ष पहले यह इलाका माओवादी आंदोलन से प्रभावित था। तब अगड़ी और पिछड़ी जातियों के बीच दूरी थी लेकिन वह दीवार अब गिर गयी है। इन सभी को लगता है कि माओवादी आंदोलन भी चीन की साजिश से ही भड़का। माओवादी आंदोलन के दौरान इन गांवों से ज्यादातर सवर्णों ने पलायन कर उत्तर प्रदेश के महराजगंज और गोरखपुर जिलों में ठौर-ठिकाना बनाया जबकि पिछड़ी जाति के लोग गांवों में ही रह गये। उप्र की सीमा पर तैनात सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) गांवों में रहने वाले मधेशियों को तब शक की निगाहों से घूरता था। अब एसएसबी का रुख नरम है।
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नई राह बना रहे मधेशी
नौतनवां से करीब दो किलोमीटर आगे पहाड़ों से निकली डंडा नदी बहती है। यह नदी भारत-नेपाल की सरहद तय करती है। धीमे बहाव वाली नदी में घुटनों तक पानी के बीच उस पार जाने को कई गांव वाले आते-जाते मिले। माओवादी आंदोलन के दौरान एसएसबी ने इस नदी से बांस का पुल हटवा दिया था। तबसे गांव वाले नदी पारकर भारत की सीमा में व्यापार व दवा के लिए आते हैं। यहां वाहन ले जाने पर रोक है। बनगाई से मर्चवार क्षेत्र होते हुए करीब 35 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद वाहन लेकर पिपरहवा जाया जा सकता है लेकिन मधेशियों के प्रति एसएसबी का रुख नरम होने से गांव वालों का उत्साह बढ़ा है। नतीजा है कि डंडा नदी पर अरसे बाद बांस का पुल बनाने की तैयारी शुरू है। पिपरहवा गांव के रामचंद्र, रामराज, सूरज रामकिशुन, श्याम बिहारी समेत कई लोग बांस-बल्ली जुटाने में लगे हैं।
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 शादियों की सियासत में मधेशी भी कम नहीं
नए संविधान में विदेशी महिला से शादी किये जाने पर सात वर्ष बाद नागरिकता दिये जाने के प्रावधान से भले उबाल आ गया है लेकिन नेपाल में शादियों की सियासत में मधेशी भी पीछे नहीं हैं। नये संविधान के विरोध में जिन बड़े मधेशी नेताओं ने मोर्चा खोला है उनमें ज्यादातर नेताओं ने अपनी शादी पहाड़ में की है। आम मधेशी इस बात की चर्चा करना नहीं भूलता कि सुरक्षा और दांव-पेंच के लिए ही इन नेताओं ने पहाड़ में अपनी शादी रचाई। नए संविधान के विरोध में चल रहे आंदोलन में सबसे प्रभावी नाम नेपाल सरकार के पूर्व मंत्री हृदयेश त्रिपाठी का है। त्रिपाठी की शादी पहाड़ी मूल में हुई। इनके अलावा पूर्व मंत्री ओमप्रकाश यादव गुलजारी और मर्चवार क्षेत्र के सांसद सर्वेन्द्र नाथ शुक्ल ने भी पहाड़ी मूल की लड़की से शादी की है। मधेशी आंदोलन में सक्रिय पूर्णमासी और रामचंद्र कहने में संकोच नहीं करते कि हमारे नेता लोग अपनी सुरक्षा और सियासत के लिए दोनों तरफ अपने लाभ का रास्ता बनाते हैं।
(आनंद राय की लेखनी से साभार)
  

बिहार की पिच पर सपा की युवा ब्रिगेड

30.09.2015
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-सियासी उतार-चढ़ाव का तजुर्बा दिलाना मुख्य उद्देश्य
-बिहार के तजुर्बे का इस्तेमाल उप्र में करने की मंशा
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परवेज अहमद, लखनऊ : सरकार और प्रदेश संगठन की कमान युवा हाथों में सौंप चुकी समाजवादी पार्टी ने अब नौजवान ब्रिगेड को सियासी उतार-चढ़ाव का तजुर्बा लेने के लिए बिहार की पिच पर उतारा है। पार्टी की सोच है कि बिहार का चुनावी अनुभव उत्तर प्रदेश में काम आएगा।
महागठबंधन से अलग होकर नया मोर्चा गठित करने वाली समाजवादी पार्टी ने युवा संगठन के ओहदेदारों को बिहार का सियासी पारा परखने और वहां की सियासी पिच पर 'बैटिंगÓ के नए प्रयोग की आजादी भी दी है। पार्टी नेतृत्व जानता है कि बिहार विधानसभा चुनाव में उसका कुछ भी दांव पर नहीं है क्योंकि पार्टी ने अब तक बिहार में जितने भी चुनाव लड़े, उनमें सबसे अधिक 2.5 फीसद वोट उसे वर्ष 2005 में मिले थे। इस वोट प्रतिशत के साथ दो सीटें भी उसके खाते में आ गयी थीं। मगर वर्ष 2010 के चुनाव में सपा का वोटों का प्रतिशत  0.6 फीसद तक पहुंच गया। ऐसे में इस चुनाव में भी सपा चमत्कार की उम्मीद नहीं कर सकती मगर बिहार चुनावों के बाद उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनावों का आहट तेज होगी और तब यही तजुर्बे उसके काम आयेंगे।
सपा के एक रणनीतिकार का कहना है कि सियासत का तौर-तरीका भी अब बदल रहा है। बिहार विधानसभा चुनाव में तकनीक के साथ रणनीति के कौशल की भी परीक्षा होनी है और सपा की युवा ब्रिगेड को इसे समझने का मौका मिलेगा। पार्टी ने छात्र सभा के प्रदेश अध्यक्ष अतुल प्रधान, युवजन सभा के प्रदेश अध्यक्ष बृजेश यादव, लोहिया वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप तिवारी और मुलायम सिंह यूथ ब्रिगेड के प्रदेश अध्यक्ष मो.एबाद, लोहिया वाहिनी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष आनंद भदौरिया, युवजन सभा के पूर्व अध्यक्ष सुनील यादव 'साजनÓ, मत्स्य निगम के अध्यक्ष राजपाल कश्यप को उनकी टीम के साथ बिहार चुनाव में जुटने का निर्देश दिया है। इन लोगों से सोशल मीडिया पर होने वाले 'युद्धÓ पर पैनी नजर रखने के लिए कहा गया है। सूत्रों का कहना है कि जिन सपा नेताओं के  परिवार के सदस्य यूपी पंचायत चुनाव में प्रत्याशी हैं, उन्हें बिहार नहीं भेजा रहा है। समाजवादी पार्टी के प्रदेश महासचिव व राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अरविंद सिंह गोप का कहना है कि यह वर्ष 2017 केविधानसभा चुनाव के पूर्वाभ्यास का है। 

Friday, 11 September 2015

...तो खाली रहेंगी परिषद की एक तिहाई सीट

31 अगस्त-2015

 लखनऊ: पंचायत चुनावों के चलते राज्य में पहली बार विधान परिषद की एक तिहाई सीटें कुछ समय रिक्त रहने के आसार हैं। दरअसल, स्थानीय प्राधिकारी क्षेत्र के 35 सदस्यों का जनवरी-2016 में कार्यकाल खत्म होगा, इस पद के नये चुनाव के मतदाताओं यानी प्रधान, बीडीसी व जिला पंचायत सदस्य के निर्वाचन की प्रक्रिया संभवत: पूरी नहीं हो पायेगी।
 सौ सदस्यों वाली राज्य विधान परिषद में एक तिहाई सदस्य (एमएलसी) स्थानीय प्राधिकारी क्षेत्र के निर्धारित हैं। प्राधिकारी क्षेत्र की सीटों के चुनाव में प्रधान, बीडीसी, जिला पंचायत सदस्य, निकायों के निर्वाचित प्रतिनिधि वोटर होते हैं। इत्तिफाक से कोटे की 35 सीटें 16 जनवरी 2016 को रिक्त हो जाएंगी।  चुनाव आयोग के नियम कहते हैं कि सीटों के रिक्त होने के 50 दिन पहले चुनावी प्रक्रिया शुरू होनी चाहिये। इस लिहाज से नवंबर के दूसरे हफ्ते में ही प्राधिकारी क्षेत्र की सीटों के चुनाव की प्रक्रिया शुरू होनी चाहिए। मगर इस बार उस समय राज्य में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव हो रहे होंगे, ऐसे में चुनाव आयोग के पास दो विकल्प होंगे। एक,पुराने सदस्यों को वोटर मानकर चुनाव कराये। दूसरा, पंचायत चुनाव का परिणाम आने का वह इंतजार करे।
विशेषज्ञों का कहना है कि फिर से चुनावी मैदान में कूद चुके पुराने प्रतिनिधियों को मतदाता मानकर चुनाव कराना किसी भी स्थिति में नैतिक नहीं होगा। नये वोटरों के जरिये एमएलसी चुनाव का विकल्प ज्यादा बेहतर होगा। दूसरा विकल्प चुने जाने पर विधान परिषद में स्थानीय प्राधिकारी क्षेत्र की एक तिहाई सीटें कुछ अरसे तक खाली रह सकती हैं। जानकारों का कहना है कि ऐसा पहली बार होगा जब राज्य में पंचायत चुनाव के चलते एमएलसी (स्थानीय प्राधिकारी क्षेत्र) के चुनाव टल सकते हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी अरूण सिंहल का कहना है पूरी परिस्थितियों पर विचार किया जा रहा है। भारत निर्वाचन आयोग को हालात की जानकारी दी गयी है। आयोग के निर्देशों के अनुरूप कार्रवाई की जायेगी।
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कब-किसका कार्यकाल खत्म होगा
-क्षेत्र पंचायत सदस्य (बीडीसी): 17 मार्च 2016
-ग्राम प्रधान:                    7 नवम्बर 2015
-जिला पंचायत सदस्य:         13 जनवरी 2016
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 एमएलसी सीटों का कार्यकाल
विधान परिषद (स्थानीय प्राधिकारी क्षेत्र)की 35 सीटें 16 जनवरी 2016 को रिक्त होंगी। इन सीटों के चुनाव में प्रधान, बीडीसी, जिला पंचायत व निकाय के निर्वाचित पदाधिकारी वोट डालते हैं।
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विधान परिषद में दलीय स्थित
बसपा: 46, सपा: 29, भाजपा: सात, कांग्रेस: दो, शिक्षक दल: पांच, निर्दल समूह: चार, रालोद: एक, रिक्त सीटें: छह

...पत्नी से ज्यादा प्यार करना चाहिये: अखिलेश

28 अगस्त-२०१५
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-मुख्यमंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिभाशाली लोगों को सम्मानित किया
-पत्नी की याद में ताज बनाने वाले की सपा करेगी मदद
लखनऊ : विरोधियों की चाल पर 'बुद्धिदांवÓ के इस्तेमाल की चुनौती, विकास का रथ बढ़ाने की कठिन डगर पार करने में जुटे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के सामने मोहब्बत का जिक्र छिड़ा तो वह भी उसमें शरीक हो गए। कहा कि 'हर इंसान को पत्नी को ज्यादा प्यार करना चाहिये।Ó फिर कहा पत्नी की याद में बुलंदशहर में 'ताजÓ बनवा रहे फैजुल कादरी की तमन्ना पूरी करने में समाजवादी पार्टी से उनकी मदद करायी जायेगी।
 खेल, साहित्य, विज्ञान के क्षेत्र के प्रतिभाशाली शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास पर जुटे थे। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी इसमें शरीक थे। उन्होंने सरकारी सेवा से सेवानिवृत 79 वर्षीय फैजुल कादरी का पत्नी के प्रति समर्पण व मोहब्बत जज्बा सुना और समझा भी...इस रूमानी गुफ्तगू को बढ़ाया फैजाबाद के सात साल के कवि मृगेंद्र राज पांडेय ने जिन्होंने डिंपल यादव की तारीफ लिखा कविता सुनी, जिसके बोल कुछ यूं थे- 'लक्ष्मी-सरस्वती का मिश्रण, डिंपल जैसी साथी है। इस महिला को देखकर, चौड़ी होती छाती है।Ó ऐसे माहौल में बोलने खड़े हुए मुख्यमंत्री ने विकास की योजनाएं गिनाने के साथ ही यह भी कहा कि 'हर किसी को पत्नी से ज्यादा प्यार करना चाहिये।Ó
 हमारे बीच हैं रीयल हीरो
अखिलेश ने कहा कि हमारे ताज की शान निराली है। इससे हजारों की रोजी-रोटी चल रही है। फैजुल के ताज को बढ़ाने का प्रयास होगा। कहा कि लोग बाहर से बड़े हीरो तलाशते हैं, जबकि हमारे बीच में न जाने कितने हीरो हैं। जरुरत उन्हें पहचानने की है।
 हादसों में मदद करने वालों का सम्मान
मुख्यमंत्री ने सड़क हादसे में घायल के मददगार सिपाही कीर्ति प्रकाश ओझा, रजनीश राठौर, हेम बाबू निगम और उदय कुमार साहू को 11-11 हजार रुपए नकद और प्रशस्ति पत्र दिया। उन्होंने कहा कि घायलों की सहायता कर मिसाल पेश की है।
तरीका तलाशने को कमेटी बनी
सड़क हादसों को रोकने पर विचार होना चाहिये। सरकार ने इसके लिये एक कमेटी गठित की है। मुख्यमंत्री ने बताया कि होली के दिन नेताजी (मुलायम सिंह) कहीं से लौट रहे थे। रास्ते में उन्हें ट्रक के नीचे एक आदमी फंसा दिखा और सड़क पर उसकी पत्नी रोती दिखी। नेताजी ने उससे पूछा कि कहां इलाज कराना चाहती हो? केजीएमयू के नाम लेते ही उन्होंने अपनी गाड़ी से उसे अस्पताल भेजा। जिससे उसकी जान बच गयी। उन्होंने लोगों का आह्वïान किया कि घायलों को अस्पताल पहुंचाने में बिलकुल नहीं हिचकें।
ये भी हुए सम्मानित
मुख्यमंत्री ने हवा से चलने वाला इंजन तैयार करने वाले बागपत निवासी हामिद सैफी, स्पीडब्रेकर से बिजली बनाने वाले सुल्तानपुर निवासी आनंद पांडेय, ड्राइवर के बिना मेट्रो चलाने के लिए हसन रजा खान, फायर और थेफ्ट सेफ्टी अलार्म के लिए वंश चतुर्वेदी व कवि मृगेंद्र को भी सम्मानित किया। उन्होंने मृगेन्द्र की किताब का भी विमोचन किया।
 ब्लैक बेल्ट की मानद उपाधि
इंटरनेशनल कुंग-फू के उपाध्यक्ष जे पी त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री को ब्लैक बेल्ट की मानद उपाधि दी। इस मौके पर प्रमुख सचिव सूचना नवनीत सहगल ने उन्हें एक तलवार भेंट की।
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इंसेट
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सेवानिवृत पोस्टमास्टर हैं फैजुल
राब्यू, लखनऊ: बुलंदशहर के कसेर निवासी व सेवानिवृत पोस्टमास्टर फैजुल कादरी बताते हैं कि दिसंबर 2011 में मौत से पहले पत्नी तज्जमुल बेगम ने उनसे कहा था कि 'मौत के बाद उन्हें कोई याद करने वाला नहीं होगा।Ó एक ऐसी इमारत बनवाई जाए, जिसके जरिये लोग उन्हें याद रखें। उन्होंने पत्नी से मिनी ताज बनवाने का वादा किया था। फरवरी 2012 में उनकी मौत के बाद उन्होंने मोहब्बत को यादगार बनाने के लिये ताज बनाने का कार्य शुरू किया था। इसकी जानकारी मिलने पर मुख्यमंत्री ने बुलंदशहर की डीएम बी.चन्द्रकला के जरिये फैजुल को लखनऊ बुलाकर सम्मानित किया।

17 और मदरसों को मिलेगा सरकारी अनुदान

25 अगस्त २०१५



 लखनऊ: प्रदेश सरकार ने आलिया स्तर के 17 और मदरसों को सरकारी मदद देने की फैसला लिया है। इससे तीन माह के दौरानअनुदान सूची में शामिल मदरसों की संख्या 92 हो गयी है।
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग से जारी शासनादेश में गुलजारे हिन्द मरकज उन्नाव, दारूल उलूम जिया-ए-मुस्तफा कानपुर नगर, मदरसा लखनऊ कैम्ब्रिज स्कूल, फात्मा गल्र्स कालेज बहराइच, मदरसा जामिया मोमिना लिलबनात जौनपुर, दारूल उलूम बरवा, हाटा कुशीनगर, मुहम्मदिया फैजेरसूल कुशीनगर, जामिया उस्मानिया गल्र्स हाईस्कूल कुशीनगर, नियाजिया कादिरिया फैजाबाद, मूरूल हुदा बिजलीपुरा शाहजहांपुर, शेख साहबजादा दारूल उलूम देवरिया, अरबिया रजाउल इस्लाम देवरिया, मिस्बाहुल उलूम नानपारा बहराइच, उमर आसिम लिलबनात जौनपुर, मदरसा फारूकिया वाराणसी, मदरसा समदानिया इस्लामिया जौनपुर को अनुदान सूची में शामिल किया गया है। इससे दो माह पहले सरकार ने 75 मदरसों को अनुदान सूची में शामिल करने का निर्णय लिया था।

हंसते हुए गये, मुंह लटकाये लौटे सपा के अध्यक्ष

22 अगस्त-२०१५



-सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने जिलाध्यक्षों को जमकर फटकारा
-चुप नहीं होने पर मुरादाबाद के जिलाध्यक्ष की ओर माइक उछाला
-अधिकारी की पैरवी पर डपटे गये आगरा के जिलाध्यक्ष
- पंचायत चुनाव प्यार से जीतने का दिया निर्देश, कहा दबंगई से प्रभावित हो सकता है विधानसभा का चुनाव

लखनऊ : हंसते-मुस्कुराते समाजवादी पार्टी दफ्तर में शनिवार को दाखिल हुए जिला, महानगर अध्यक्ष, महासचिव पांच घंटे बाद 'मुंह लटकायेÓ बाहर निकले। साढ़े तीन साल में पहला मौका था, जब मुलायम सिंह यादव ने पार्टी केओहदेदारों की कारगुजारी का न सिर्फ चिट्ठा खोला बल्कि डेढ़ माह बाद होने वाली बैठक में पद से बर्खास्त कर देने की चेतावनी दी है। चेतावनी के बाद भी बोलते जा रहे मुरादाबाद के जिलाध्यक्ष की ओर उन्होंने माइक उछालकर खामोश रहने की चेतावनी दी और कहा कि वह सब जानते हैं।
सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने पंचायत चुनाव की तैयारियों के लिए जिला, महानगर अध्यक्ष व महासचिवों की बैठक बुलाई थी, इसमें राज्य कार्यकारिणी के सदस्य भी शामिल थे। सुबह 11 बजे शुरू हुई तो बैठक में पार्टी के ओहदेदार पंचायत चुनाव की तैयारियों पर चर्चा करते रहे, दोपहर करीब एक बजे सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बैठक में पहुंचे।
और मुलायम ने पंचायत चुनाव के लिये बूथ कमेटियों के गठन की जानकारी मांगी। सही जवाब नहीं मिलने पर मुलायम का भड़क गये। सूत्रों का कहना है कि य ह पहला मौका था जब मुलायम ने किसी को नहीं बख्शा। हर किसी का चिट्ठा सामने रखते हुए कहा कि कोई ठेकेदारी में उलझा है। कोई गुटबाजी कर रहा है। बूथ कमेटी तक ठीक से नहीं बनी है। पंचायतों में पकड़ से ही विधानसभा, लोकसभा का चुनाव जीता जाता है। जब कुछ खराब कर दिया। आगरा के जिलाध्यक्ष ने कुछ बोलने का प्रयास किया तो मुलायम ने उसे भी डपट लिया। चेतावनी के बावजूद भी तर्क देने पर आमादा मुरादाबाद के जिलाध्यक्ष की ओर माइक उछाल कर उसे चुप कराया। सूत्रों का कहना है कि मुलायम ने सरकार, मंत्रियों, संगठन के ओहदेदारों में से किसी भी नहीं बख्शा। उन्होंने कहा कि अगले डेढ़ माह बाद होने वाली बैठक में अगर सब कुछ ठीक नहीं हुआ तो वहीं अध्यक्षों को बर्खास्त किया जायेगा।
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 मोबाइल फोन बाहर रखवाए
समाजवादी पार्टी के सियासी सफर में यह भी पहला मौका था जब पार्टी पदाधिकारियों के मोबाइल फोन व अन्य इलेक्ट्रानिक उपकरण सभागार से बाहर रखवा लिये गये। पदाधिकारियों को चेताया गया कि अगर किसी ने मीडिया से बात की तो उसकी खैर नहीं होगी। अमूमन समाजवादियों को मीडिया में बात रखने की खुली छूट रहती थी, लेकिन इस पर सख्ती से पाबंदी लगायी गयी थी।
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प्यार से जीतो पंचायत चुनाव
सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने कहा कि पंचायतों पर ज्यादा से ज्यादा सपा समर्थकों की जीत सुनिश्चित की जाये। लेकिन इसमें किसी भी तरह का विवाद या दबंगई नहीं होनी चाहिये। उन्होंने चेताया कि दबंगई का प्रभाव विधानसभा चुनाव पर पड़ सकता है, इसलिए कार्यकर्ता सरकार की नीतियों की जानकारी देकर प्यार से चुनाव जीतने का प्रयास करें। उन्होंने सपा समर्थकों के बीच चुनावी लड़ाई नहीं होने देने का प्रयास करने का सुझाव भी दिया। कार्यकर्ताओं के बीच सामंजस्य बनाने की हिदायत भी दी।
सपा प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने बताया कि पार्टी अध्यक्ष मुलायम सिंह  यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी का लक्ष्य लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करना और सत्ता का विकेन्द्रीयकरण करना है। ग्राम प्रधान के जरिये विकास की रफ्तार तेज की जा सकती है। जिला पंचायत अध्यक्ष पद का चुनाव पार्टी लड़ायेगी। अन्य पदों के लिए होने वाले चुनाव में प्रत्याशियों को समर्थन देगी। विधानसभा चुनाव के लिये क्षेत्रवार बूथ कमेटियों के गठन का कार्य 31 अगस्त तक पूरा करने का निर्देश दिया है।
अब मंत्रियों की बारी
सपा मुखिया मुलायम सिंह ने मंत्रियों की कार्य प्रणाली पर भी नाराजगी जाहिर करते हुये कहा कि वह कार्यकर्ताओं की नहीं सुन रहे हैं। जनता के काम नहीं कर रहे हैं। इससे लोगों में नाराजगी होने की उन्हें जानकारी मिल रही है। अभी चुनाव हो जायें तो फिर सरकार बनाने में खासी मुश्किल होगी। इशारा किया कि जल्द ही मंत्रियों की बैठक बुलायेंगे, जिसमें कुछ लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी होगी। उन्होने मुख्यमंत्री अफसरों के जरिये स्थान पर सीधे लोगों से मिलने का सुझाव भी दिया।
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साइकिल यात्रा पर हुई चर्चा
राज्य कार्यकारिणी की बैठक में जिला, महानगर तथा विभिन्न प्रकोष्ठो की नियमित बैठक करने पर जोर देते हुए कहा कि मुख्य संगठन के पदाधिकारी उनका नियमित मार्ग दर्शन करें। इसके साथ 5 से 12 अगस्त,2015 तक चली साइकिल यात्रा पर चर्चा में बताया गया कि 66 जनपदो में यात्रा के उत्साहपूर्ण परिणाम रहे। बचे हुए जिलों में 22 अगस्त से फिर साइकिल यात्रा शुरू की गयी है।
   

एक महिला से चार पुरुष रेप कर नहीं सकते: मुलायम

18 अगस्त-२०१५
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लखनऊ: समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव का कहना है कि एक महिला के साथ चार पुरुष रेप (दुष्कर्म)कर ही नहीं सकते है। रेप एक व्यक्ति करता है, लेकिन मुकदमा तीन के खिलाफ दर्ज होता है।
रिक्शा चालकों को मुफ्त ई-रिक्शा वितरण समारोह में मुलायम सिंह ने जोर देकर कहा कि भाजपा शासित मध्य प्रदेश में नौ फीसद, राजस्थान में रेप का प्रतिशत सात के ऊपर है, जबकि उत्तर प्रदेश में दो फीसद रेप है। फिर भी राज्य सरकार के खिलाफ दुष्प्रचार चल रहा है। दुष्कर्म की वारदातें खत्म करने के लिए राज्य सरकार को नीति बनानी चाहिये। उन्होंने कहा कि रेप की वारदातों में दिल्ली की हालत बदतर है।
कानून व्यवस्था खराब होने के इल्जामों पर पलटवार करते हुए मुलायम ने कहा कि सपा सरकार के खिलाफ सुनियोजित तरीके से दुष्प्रचार किया और कराया जा रहा है। भाजपा के शासन वाले मध्यप्रदेश, राजस्थान व अन्य राज्यों में उत्तर प्रदेश से ज्यादा अपराध हो रहे हैं। कार्यक्रम में मौजूद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से उन्होंने कहा कि रेप की वारदातें खत्म करने के लिए नीति बनायें। भाजपा के झूठे प्रचार पर अंकुश लगायें।
बदायूं काण्ड पर सबको कोसा
मुलायम ने बदायूं दुष्कर्म हत्याकांड पर विपक्षी दलों को निशाना बनाते हुये कहा कि सीबीआइ जांच से खुलासा हुआ कि जायदाद के लिये दोनों लड़कियों को चचेरे भाइयों ने मारा था। मगर उस समय बिना जांच पड़ताल के सोनिया गांधी का बेटा (राहुल) वहां पहुंच गया। पिछड़े वर्ग के परिवार के साथ हुई वारदात को दलित परिवार का प्रचारित कर बिहार तक के वे नेता वहां पहुंच गये। जिनका पीडि़तों से कोई लेना-देना नहीं है। ऐसे ही लोगों ने 'चलो बदायूं-चलो बदायूंÓ का शोर मचा दिया। सच्चाई सामने आने पर भी इन लोगों ने गलती का ऐहसास नहीं किया।
हमने जवाब दिया
पूर्व की एक घटना का जिक्र करते हुए मुलायम ने कहा कि झूठ का जवाब दिया जाना चाहिये। एक महिला के बारे में बुकलेट जारी होने का उल्लेख करते हुए कहा कितब उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस कर उसका जवाब दिया था। इसलिये झूठ का हमेशा जवाब दिया जाना चाहिये।

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सीमा पर कुछ होते रहने की साजिश- मुलायम
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-पाकिस्तान से हो रही फायङ्क्षरग पर केन्द्र सरकार को कटघरे में खड़ा किया
-मीटिंग बुलाकर ठोस कार्रवाई का सुझाव दिया लेकिन असर नहीं

लखनऊ : संसद में गतिरोध पर केन्द्र सरकार के हिमायती बने सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने पाकिस्तान की ओर से फायङ्क्षरग के लिए नरेन्द्र मोदी सरकार को कटघरे में खड़ा किया। किसी का नाम लिए बगैर कहा कि गोलीबारी रोकने के स्थान पर सीमा पर कुछ होते रहने की साजिश की जा रही हैं।
 यहां के लोहिया पार्क में मंगलवार को ई-रिक्शा वितरण समारोह में मुलायम ने केन्द्र सरकार पर तीखा हमला किया। कहा कि सीमा की स्थिति अच्छी नहीं है। पाकिस्तान रोज फायङ्क्षरग कर रहा है। जवान शहीद हो रहे हैं। हमने मीटिंग बुलाकर ठोस कार्रवाई का सुझाव दिया लेकिन उसका प्रभाव नहीं दिखा। हम नहीं चाहते कि सीमा पर हमारे जवान यूं ही शहीद हों। रक्षा मंत्री के अपने कार्यकाल का जिक्र करते हुए मुलायम ने उस समय पड़ोसी ने हमारे पांच हेलीकाप्टर मार गिराये, जानकारी मिलते ही तीनों सेनाध्यक्षों को बुलाकर एक साथ जवाब देने का निर्देश दिया था, हमारी सेना ने जवाब दिया। सौ से ज्यादा दुश्मन मारे गये। बस, शांति हो गयी, फायङ्क्षरग बंद हो गयी। उस समय के प्रधानमंत्री ( अब स्वर्गीय) का नाम लिए बगैर कहा कि तब के प्रधानमंत्री को रात में जगाया तो उन्होंने उस समय भी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रहे नवाज शरीफ से बात हो जाने की जानकारी दी थी, जिस पर असहमति जताते हुए हमने सेना को कार्रवाई की इजाजत दी थी। मुलायम ने देश की विदेश नीति को भी कमजोर ठहराया। हालांकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कीविदेश यात्रा पर वह चुप्पी साधे रहे।
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सरकार को सराहा, कुछ मंत्रियों को कोसा
मुलायम ने राज्य की समाजवादी सरकार की नीतियों, फैसलों की सराहना करते हुए कहा कि देश की किसी भी राज्य सरकार ने इतना काम नहीं किया। मुख्यमंत्री व कुछ मंत्री अच्छा काम कर रहे हैं लेकिन कई मंत्री गड़बड़ कर रहे हैं। उनके पास इसकी रिपोर्ट है। उन्होंने ऐसे लोगों का टिकट काटे जाने का संकेत भी दिया।
एक परिवार के सांसद
लोकसभा में समाजवादी पार्टी के सांसदों की संख्या पांच होने को लेकर बिहार के एक भाजपा नेता द्वारा संसद में तंज किये जाने का दर्द भी मुलायम ने बयां किया। कहा कि जनता सिर्फ पांच सांसद जिताये, इसलिये एक परिवार के सांसद वाला दल होने का व्यंग्य सुने। हालांकि जवाब दिया है कि जनता ने उनके परिवार पर विश्वास किया है तो यही उनके दल को विपक्ष में बैठने पर मजबूर करेगा। कार्यकर्ताओं से दिल्ली की सरकार पर नजर टिकाने और राज्य में फिर सरकार बनाने के लिए संकल्प लेने का आह्रïवान भी किया।




प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष जावेद आब्दी बर्खास्त

१३ अगस्त-२०१५



लखनऊ: मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष जावेद आब्दी को उनके पद से बर्खास्त कर दिया है। कार्रवाई के पीछे के कारणों का खुलासा नहीं किया गया है। लेकिन समझा जाता है कि स्लाटर हाउसों के नवीनीकरण, पशुबध की संख्या में इजाफा व ईंट भट्टों को अनापत्ति देने में भ्रष्टाचार की शिकायतों के चलते आब्दी को पद से बर्खास्त किया गया है। पार्टी में यह भी चर्चा महासचिव शिवपाल यादव को पूरी तरह से सम्मान नहीं देने की चलते उनकी विदाई हुई है।

प्रधान पद के युवा दावेदारों पर होंगी सपा की निगाहें

१२ अगस्त-२०१५

राज्य ब्यूरो, लखनऊ: पंचायत चुनाव को विधानसभा चुनाव की उल्टी गिनती मानकर रणनीति तैयार करने में जुटी समाजवादी पार्टी ने जातीय, क्षेत्रीय व युवा वोटरों के खांचे में फिट दावेदारों की तलाश में लगी है। पार्टी ने संगठन के ओहदेदारों से जिला पंचायत सदस्य पद पर ताल ठोंक रहे दावेदारों के बारे में रिपोर्ट मांगी है। सूत्रों का कहना है कि सप प्रधान पद के युवा प्रत्याशियों को समर्थन देने की रणनीति पर कार्य कर रही है।
लोकतंत्र की सबसे छोटी इकाई ग्राम पंचायतों के चुनाव खत्म होने के फौरन बाद विधान परिषद में स्थानीय निकाय कोटे की 36 सीटों का चुनाव होना है। उसके बाद विधानसभा चुनाव की आहट महसूस होने लगेगी। इससे वाकिफ समाजवादी पार्टी पंचायत चुनाव में दबदबा कायम कर विपक्षी दलों को गांव में पकड़ गहरी का संदेश देने की मुहिम में लगी है। वह अगर इस मकसद में कामयाब हुई तो निकाय कोटे की एमएलसी सीटों के उसके प्रत्याशियों की राह आसान होगी ही, विधानसभा चुनावों का माहौल बनाने में भी उसे मदद मिलेगी।
इसी रणनीति के तहत समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जिला इकाइयों से प्रधान, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत के दावेदारों का ब्यौरा मांगा है। जिलाध्यक्ष, क्षेत्रीय विधायक व मंत्रियों को पार्टी समर्थकों के बीच चुनावी टकराव रोकने का निर्देश दिया है। इसके साथ जिला पंचायत केप्रत्येक वार्ड के लिये प्रभारी व प्रेक्षक नियुक्त करने की भी तैयारी है। इनको मतदाताओं के बीच समीकरणों को दुरुस्त करने के तौर-तरीके समझाए जाएंगे। मसलन किस-किस तरह के सामाजिक समीकरणों में कैसे लोगों को चुनाव मैदान में उतारा जा सकता है। मंत्री व सपा के प्रदेश प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी का कहना है कि समाजवादी पार्टी पंचायत चुनावों पर पैनी नजर रख रही है। पार्टी के राज्य संसदीय बोर्ड ने जिला पंचायत अध्यक्ष पद का चुनाव लडऩे का फैसला किया है लेकिन ग्र्राम प्रधान से लेकर क्षेत्र पंचायत तक के दावेदारों पर पैनी निगाह रहेगी। सपा समर्थकों को पार्टी के पदाधिकारी रणनीति तैयार करने में पूरी मदद करेंगे।

सपा जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर प्रत्याशी लड़ाएगी

११ अगस्त-२०१५



-त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए उच्च स्तरीय कमेटी गठित करने का निर्णय
 -जिला पंचायत अध्यक्ष पद का प्रत्याशी चुनने को प्रेक्षक नियुक्त का फैसला
-फरवरी 2016 में फिर निकलेगी साइकिल यात्रा निकालने का फैसला
-169 सीटों के लिए टिकट के दावेदारों का पैनल मुख्यमंत्री को सौंपा, मुलायम को दिया फैसले का अधिकार
-कांवड़ यात्रा के चलते सात जिलों में रुकी साइकिल यात्रा 17 अगस्त से
, लखनऊ: समाजवादी पार्टी ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत से लेकर जिला पंचायतों में कब्जा करने की पुरजोर कोशिश करेगी, मगर प्रत्याशी सिर्फ जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए उतारेगी। सपा की राज्य संसदीय बोर्ड ने यह फैसला लिया है। वर्ष 2012 में हारी169 विधानसभा सीटों पर प्रत्याशी घोषित करने का अधिकार मुलायम सिंह यादव को सौंप दिया गया।
मुख्यमंत्री व प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव की अध्यक्षता में हुई समाजवादी पार्टी की राज्य संसदीय बोर्ड की बैठक में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव मुख्य रूप से चर्चा हुई, कुछ सदस्यों ने दलीय आधार पर प्रधानों, बीडीसी (क्षेत्र पंचायत सदस्य) व जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लडऩे का प्रस्ताव रखा, जिस पर सहमति नहीं बनने के बाद तय किया गया कि पार्टी सिर्फ जिला पंचायत अध्यक्ष पद का प्रत्याशी उतारेगी। प्रत्याशी चयन के लिये राज्य स्तरीय कमेटी गठित होगी और जिलों में प्रेक्षक भेजे जाएंगे। हालांकि पूरे चुनाव पर नजर रखने व समर्थकों को चुनावी संसाधन उपलब्ध कराने के लिए उच्च स्तरीय कमेटी गठित करने का निर्णय लिया गया।
वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में हारी 169 सीटों पर टिकट के दावेदारों का 23 जुलाई से नौ अगस्त तक साक्षात्कार लेने वाली चयन समिति ने तीन-तीन दावेदारों का पैनल राज्य संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष अखिलेश यादव को सौंपा, इस पर चर्चा के बाद प्रत्याशी तय करने का अधिकार राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव को सौंप दिया गया। स्मार्ट सिटी की दावेदारी में लखनऊ, वाराणसी, मेरठ, गोरखपुर, कानपुर, आगरा को भी शामिल कराने पर भी चर्चा हुई।
 5 से 12 अगस्त तक निकली समाजवादी साइकिल यात्रा की सराहना करते हुए फरवरी 2016 में फिर से साइकिल यात्रा निकालने व गांव में विश्राम करने की रूपरेखा तैयार करने का निर्णय लिया गया। कांवड़ यात्रा के चलते आठ जिलों में स्थगति की गयी साइकिल यात्रा 17 अगस्त से फिर शुरू करने का निर्णय लिया गया। सरकार के साढ़े तीन वर्षो के कार्यकाल में सपा के चुनाव घोषणा पत्र के वादे पूरे होने पर संतोष जताया गया। सरकार की छवि को और बेहतर करने पर भी जोर दिया गया।
राज्य संसदीय बोर्ड की बैठक में शिवपाल सिंह यादव, माता प्रसाद पाण्डेय,  बलराम यादव, अहमद हसन, अवधेश प्रसाद, अरविन्द कुमार सिंह गोप, डा0 केसी पाण्डेय, श्रीपति सिंह, भगवती सिंह, व नरेश उत्तम, एमएलसी एसआरएस यादव, मंत्री राजेन्द्र चौधरी ने भी हिस्सा लिया।
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लोकायुक्त व एमएलसी पर भी चर्चा
नामित कोटे की विधान परिषद सीटों व लोकायुक्त की नियुक्ति पर राजभवन के सवालों पर भी राज्य संसदीय बोर्ड की बैठक में चर्चा हुई। सूत्रों का कहना है कि दोनों प्रकरणों में सरकार को अपने फैसले पर अडिग रहने की बात कही गयी, हालांकि इसको लेकर कोई प्रस्ताव पास नहीं किया गया। सपा सूत्रों का कहना है कि सरकार अपने फैसले पर कायम रहने का मन बनाये हुए हैं। 

तलाक पर कुरआन व हदीस का फैसला अंतिम : कुरैशी

३ सितम्बर-२०१५
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-सुन्नी उलमा काउंसिल के सुझाव को पसर्नल ला बोर्ड ने खारिज किया
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राज्य ब्यूरो, लखनऊ : आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने एक बार में तीन बार तलाक कहने से परिवार टूटने की दुश्वारियां दूर करने कीसुन्नी उलमा काउंसिल की मांग खारिज कर दी है। बोर्ड का मानना है कि कुरआन व हदीस की रोशनी में किए गए फैसले में फेरबदल नहीं हो सकता है।
काउंसिल ने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, देवबंद व बरेलवी उलमा को लिखे खत में मिस्र, सूडान, इराक का हवाला देते हुए कहा था कि इन मुल्कों में तलाक में तीन माह केअंतर का कानून है। काउंसिल के महामंत्री हाजी मोहम्मद सलीस का मानना है कि पति अपनी पत्नी को एक बार में तीन बार तलाक कहता है तो उसे तलाक न माना जाए बल्कि प्रत्येक माह के अंतर में तीन बार  तलाक कहने पर ही  उसे तलाक माना जाये। आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने काउंसिल की मांग व  तर्क को खारिज कर दिया है। बोर्ड के प्रवक्ता अब्दुररहीम कुरैशी ने हैदराबाद से फोन पर बताया कि तलाक पर कुरआन व हदीस की रोशनी से इतर कोई फैसला नहीं किया जा सकता है। हजरत मोहम्मद की सुन्नत की रोशनी में इस मुद्दे पर कोई चर्चा हो सकती है। पर्सनल लॉ बोर्ड अपने फैसले कुरआन की रोशनी में ही करता है। उनका कहना है कि इस तरह के मुद्दे उछालने से गुरेज किया जाना चाहिये।

वक्फ बोर्ड को अच्छे खेवनहार की तलाश



-अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने प्रमुख सचिवों से पूछी अ'छे अधिकारियों की उपलब्धता
-इ'छा जताने पर अधिकारी को सीईओ नियुक्त कराने का प्रयास होगा: वसीम रिजवी

राज्य ब्यूरो, लखनऊ : मुख्तलिफ कारणों से विवादों में घिरे शिया सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड को मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) की तलाश है। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने प्रमुख सचिवों को खत लिखकर इस पद के लिये काबिल अधिकारी की उपलब्धता पूछी है।
शिया सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड के सीईओ का पद तकरीबन दो साल से रिक्त चल रहा है। कुछ समय के लिये एनएच रिजवी को कार्यवाहक सीईओ का कार्यभार सौंपा गया। बाद में शासन ने अधिकारी कोटे से उन्हें शिया वक्फ बोर्ड का सदस्य नामित कर दिया। जिससे यह पद फिर रिक्त हो गया।
शिया सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड के प्रशासनिक विभाग अल्पसंख्यक कल्याण के निदेशक ने सभी प्रमुख सचिवों को लिखकर सीईओ के पद पर कार्य के लिये इ'छुक 'अच्छे अधिकारीÓ की उपलब्धता का ब्यौरा मांगा है। सूत्रों का कहना है कि कोई अधिकारी इस पद कार्य को तैयार नहीं है। दरअसल, वक्फ संपत्तियों पर कब्जा, भ्रष्टाचार और बोर्ड की चुनावी प्रक्रिया को लेकर शिया धर्म गुरु मौलाना कल्बे जवाद व अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री आजम खां के बीच रार छिड़ी है। आरोप-प्रत्यारोप के बीच सरकार ने शिया सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड का चुनाव करा दिया। इसमें आजम समर्थक वसीम रिजवी अध्यक्ष निर्वाचित किये गये। इसके विरोध में आंदोलन शुरू हो गया।
 सूत्रों का कहना है कि विवाद के भय से अधिकारी पद पर कार्य करने से इंकार कर रहे हैं। कई अधिकारियों ने शिया वक्फ बोर्ड ही नहीं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में भी काम करने से इंकार कर रखा है।
शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी का कहना है कि अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में अधिकारियों की कमी के चलते  सीईओ पद पर इ'छुक अधिकारी को 'आन डेपुटेशनÓ बुलाने का प्रयास चल रहा है। मगर अब तक कामयाबी नहीं मिली है। अगर कोई अ'छा अधिकारी इ'छा जतायेगा तो उसकी तैनाती का प्रयास किया किया जायेगा।

Thursday, 10 September 2015

समाजवादी चिंतन की टूटी एक और कड़ी



-बौद्ध दर्शन के प्रकांड विद्वान प्रो.कृष्णनाथ शर्मा का तिरोधान
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 : प्रख्यात समाजवादी  चिंतक, बौद्ध दर्शन के प्रकांड विद्वान, लेखक व अर्थशास्त्री 81 वर्षीय प्रो. कृष्ण नाथ का निधन बेंगलुरु स्थित जे. कृष्ण फाउंडेशन परिसर में निधन हो गया। उनके निधन पर बुद्धिजीवियों व बौद्ध जगत में शोक की लहर दौड़ पड़ी।
प्रो. कृष्ण नाथ का जन्म एक मई 1934 को काशी में हुआ था। डॉ. आचार्य नरेन्द्रदेव की प्रेरणा से वह 1950 से ही समाजवादी आंदोलन में सम्मिलित हो गए। डा. राममनोहर लोहिया के सक्रिय सहयोगियों में प्रो. कृष्ण नाथ एक रहे। आंदोलनों व सत्याग्रह के दौरान लगभग 13 बार जेल की यात्राएं करनी पड़ी। प्रो. कृष्ण नाथ ने कॅरियर की शुरुआत वर्ष 1961 में काशी विद्यापीठ के अर्थशास्त्र विभाग से की और वर्ष 1994 में विभागाध्यक्ष पद से सेवानिवृत्त हुए थे। उत्तर प्रदेश सरकार ने 1992 में उन्हें डा. लोहिया पुरस्कार से सम्मानित किया था। बौद्ध दर्शन के योगदान को देखते हुए गत माह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उन्हें सम्मानित किया। प्रो. कृष्ण नाथ का अंतिम संस्कार सात सितंबर को बेंगलुरु में होगा।

सपा जिलाध्यक्षों से दावेदारों का पैनल मांगा गया


8.09.2015

आपसी सहमति से प्रत्याशी तय करेगी सपा
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-पंचायत चुनाव-
-दावेदारों के बीच सहमति बनाने में जुटी पार्टी
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राज्य ब्यूरो, लखनऊ : जिला व क्षेत्र पंचायतों पर कब्जा करने की रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटी समाजवादी पार्टी ने आपसी सहमति के आधार पर प्रत्याशियों के बारे में निर्णय करने का फैसला किया है।
मंत्री व सपा के प्रदेश प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने कहा है कि पार्टी दावेदारों की सूची तैयार करने के स्थान पर सहमति के आधार पर प्रत्याशियों के नाम पर विचार कर निर्णय करेगी। जिला पंचायतों के आरक्षण की अनंतिम सूची जारी होने के बाद गांवों में तेज होती चुनाव बयार पर नजर रख रही समाजवादी पार्टी चुनाव लडऩे के दावेदारों के बीच सहमति बनाने में जुटी है। सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव जिला पंचायत सदस्य पद केप्रत्याशियों को समर्थन देने की बात कह चुके हैं। पार्टी के रणनीतिकार दावेदारों की रणनीति पर नजर रख रहे हैं।

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07.09.2015


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-पंचायत चुनाव-
-सांप्रदायिक गोलबंदी के प्रयासों से आगाह रहें कार्यकर्ता : सपा
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राज्य ब्यूरो, लखनऊ : समाजवादी पार्टी पंचायत चुनाव को विधानसभा का 'पहला द्वारÓ मानकर उसे भेदने की रणनीति पर कार्य कर रही है। जिला पंचायत सदस्य के दावेदारों को समर्थन पर मंथन तेज हो गया है। पार्टी ने जिलाध्यक्षों से तीन दिनों के अंदर संभावित दावेदारों के नामों का पैनल मांगा है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अध्यक्षता वाली राज्य चुनाव संचालन समिति उस पर अंतिम निर्णय करेगी।
जिला पंचायत सदस्य, बीडीसी (क्षेत्र पंचायत सदस्य) और ब्लाक प्रमुख पद के आरक्षण की अनन्तिम सूची जारी होने के बाद सपा चुनाव संचालन समिति ने जिलाध्यक्षों से चुनावी समर में कूदने को तैयार कार्यकर्ताओं के पैनल के साथ उनकी सियासी 'कुंडलीÓ और क्षेत्रीय समीकरण भेजने को कहा है। प्रदेश सचिव एसआरएस यादव ने जिलाध्यक्षों को भेजे निर्देश में मुख्यमंत्री व प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव का हवाला देते कहा है कि कि 'गांव-देहात के नुक्कड़ों, चौपालों पर सियासी हलचल शुरू हो गयी है। विरोधी दल बिसात बिछा रहे हैं। सांप्रदायिक गोलबंदी के साथ अभी से जातीय गोटियां बिछायी जा रही हैं। चुनाव करीब होते ही नए-नए हथकंडों का इस्तेमाल शुरू हो जायेगा। इससे न सिर्फ सावधान रहें बल्कि साजिशों को नाकाम करने में जुट जाएं।Ó यादव ने कहा है कि दावेदारों का पैनल तीन दिनों में पार्टी मुख्यालय भेजा जाए ताकि कार्यकर्ताओं में संभावित टकराव टाला जा सके।
राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) व प्रत्याक्षी चयन समिति सदस्य अरविंद सिंह गोप का कहना है कि पार्टी पंचायत चुनाव केआधार पर वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव की रणनीति निर्धारित करेगी। राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ पंचायत चुनाव में मिलेगा। सपा प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी का कहना है कि पार्टी कार्यकर्ता पंचायत चुनाव के लिए पूरी तरह से तैयार है। सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव जिला पंचायत सदस्य पद केप्रत्याशियों को समर्थन देने की बात कह चुके हैं, लिहाजा दावेदारों की रणनीति पर नजर रखी जा रही है। जल्द ही समर्थित प्रत्याशियों की घोषणा हो जाएगी।

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आइएस की करतूत गैर इस्लामी

10.09.2015
-दारुल उलूम ने कहा- दहशतगर्दी के खिलाफ दिया जा चुका है फतवा
-इस्लाम विरोधी ताकतों ने खड़ा किया आइएस संगठन
 देवबंद : आतंक का पर्याय बन चुके आइएस के खिलाफ भारत के इस्लामी विद्वानों द्वारा दिए गए फतवे का देवबंदी उलेमा ने भी समर्थन करते हुए आइएस की करतूतों को गैर इस्लामी करार दिया है। मोहतमिम ने कहा है कि दारुल उलूम हर प्रकार की दहशतगर्दी के खिलाफ इस्लाम का मत फतवे के रूप में पहले ही दुनिया के सामने रख चुका है।
एक हजार से अधिक इस्लामिक विद्वानों और मुफ्तियों द्वारा आइएस के खिलाफ जारी फतवे को सही बताते हुए दारुल उलूम के मोहतमिम मुफ्ती अबुल कासिम नौमानी का कहना है कि दारुल उलूम 2008 में हर प्रकार की दहशतगर्दी के खिलाफ फतवा दे चुका है। यह फतवा पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है और पूरी दुनिया इसको मानती है। हम किसी एक दहशतगर्द तंजीम के खिलाफ नहीं बल्कि हर हर प्रकार की दहशतगर्दी के खिलाफ इस्लाम का मत फतवे के रूप में दुनिया के सामने रख चुके हैं। दारुल उलूम के वरिष्ठ उस्ताद मुफ्ती मोहम्मद आरिफ कासमी ने आइएस को इजराइल द्वारा मुसलमानों व इस्लाम को बदनाम करने के लिए खड़ा किया गया संगठन बताया। उन्होंने कहा कि आईएस की करतूतें पूरी तरह गैर इस्लामी हंै। आइएस की हरकतों से मुसलमान और इस्लाम पूरी दुनिया में बदनाम हो रहा है। आइएस की कयादत करने वाले मुसलमान है ही नहीं। बल्कि आइएस यहूदियों के  कहा कि औरतों, बच्चों, बूढ़ों और किसी भी धर्म की धार्मिक हस्तियों को मारना और उनको नुकसान पहुंचाना अल्लाह और हजरत मोहम्मद साहब के बताए हुए उसूलों के खिलाफ है। आइएस के खिलाफ पूरी दुनिया का लामबंद होना जरूरी है।
प्रसिद्ध इस्लामी विद्वान और अल कुरान फाउंडेशन के अध्यक्ष मौलाना नदीमुल वाजदी ने कहा कि देवबंदी उलेमा पहले ही कह चुके हंै कि आइएस आतंक फैलाने का काम कर रहा है। आइएस जिस तेजी के साथ फैल रहा है और जिस अंदाज में काम कर रहा है, उसके पीछे बड़ी इस्लाम विरोधी ताकत है। आईएस मुस्लिम देशों को तबाह करने के लिए खड़ी की गई तंजीम है।


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मायावती व ओवैसी आएंगे एक साथ!

10.09.2015

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-उप्र में नये सियासी गठबंधन में जुटे पूर्व राज्यसभा सदस्य मोहम्मद अदीब
-कहा, भाजपा के इशारे पर मुलायम ने तोड़ा बिहार में गठबंधन
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राज्य ब्यूरो, लखनऊ : बिहार विधानसभा चुनाव की सरगर्मी के बीच उत्तर प्रदेश की सियासत में नये गठबंधन के प्रयास चल पड़े हैं। राज्यसभा के पूर्व सदस्य मोहम्मद अदीब ने आल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एमआइएम) व बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के बीच सियासी गठबंधन कराने का बीड़ा उठाया है। उन्होंने इल्जाम लगाया कि सपा मुखिया मुलायम सिंह ने भाजपा के इशारे पर बिहार में महागठबंधन तोड़ा है।
धर्मगुरु मरहूम अली मियां व इतिहासकार विशंभर नाथ पांडेय द्वारा सांप्रदायिक सदभाव के लिए बनाई गई समिति की बैठक में हिस्सा लेने आए मोहम्मद अदीब ने बिहार में महागठबंधन से अलग होने पर समाजवादी पार्टी को आड़े हाथों लिया। कहा कि परिवार की तरक्की व उसको बचाने के लिए मुलायम सिंह यादव ने भाजपा से हाथ मिलाया है। वह पूर्व में भी साक्षी महराज, पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को अपने साथ लेकर सियासत कर चुके हैं। इस सच्चाई से वाकिफ मुसलमानों के पास अब बसपा ही एक मात्र विकल्प है। वह समाजवादी पार्टी की असलियत जनता के सामने लाने के प्रयास के साथ ही मुस्लिम संगठनों को एक मंच पर खड़ा करने की मुहिम चला रहे हैं। इस संबंध में नदवातुल उलूम के उलमा से भी बात हुई है। अदीब ने कहा कि उत्तर प्रदेश में चुनाव के समय मुस्लिम वोटों का बंटवारा रोकने के लिए एमआइएम व बहुजन समाज पार्टी को एक मंच पर खड़ा होना जरूरी है। इस बारे में असदउद्दीन ओवैसी से  चर्चा हुई है। शुक्रवार को दिल्ली या हैदराबाद में उनसे फिर बात होगी। सहमति बनने के बाद बसपा मुखिया मायावती से विस्तार से बातचीत की जाएगी।

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