१२ अगस्त-२०१५
राज्य ब्यूरो, लखनऊ: पंचायत चुनाव को विधानसभा चुनाव की उल्टी गिनती मानकर रणनीति तैयार करने में जुटी समाजवादी पार्टी ने जातीय, क्षेत्रीय व युवा वोटरों के खांचे में फिट दावेदारों की तलाश में लगी है। पार्टी ने संगठन के ओहदेदारों से जिला पंचायत सदस्य पद पर ताल ठोंक रहे दावेदारों के बारे में रिपोर्ट मांगी है। सूत्रों का कहना है कि सप प्रधान पद के युवा प्रत्याशियों को समर्थन देने की रणनीति पर कार्य कर रही है।
लोकतंत्र की सबसे छोटी इकाई ग्राम पंचायतों के चुनाव खत्म होने के फौरन बाद विधान परिषद में स्थानीय निकाय कोटे की 36 सीटों का चुनाव होना है। उसके बाद विधानसभा चुनाव की आहट महसूस होने लगेगी। इससे वाकिफ समाजवादी पार्टी पंचायत चुनाव में दबदबा कायम कर विपक्षी दलों को गांव में पकड़ गहरी का संदेश देने की मुहिम में लगी है। वह अगर इस मकसद में कामयाब हुई तो निकाय कोटे की एमएलसी सीटों के उसके प्रत्याशियों की राह आसान होगी ही, विधानसभा चुनावों का माहौल बनाने में भी उसे मदद मिलेगी।
इसी रणनीति के तहत समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जिला इकाइयों से प्रधान, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत के दावेदारों का ब्यौरा मांगा है। जिलाध्यक्ष, क्षेत्रीय विधायक व मंत्रियों को पार्टी समर्थकों के बीच चुनावी टकराव रोकने का निर्देश दिया है। इसके साथ जिला पंचायत केप्रत्येक वार्ड के लिये प्रभारी व प्रेक्षक नियुक्त करने की भी तैयारी है। इनको मतदाताओं के बीच समीकरणों को दुरुस्त करने के तौर-तरीके समझाए जाएंगे। मसलन किस-किस तरह के सामाजिक समीकरणों में कैसे लोगों को चुनाव मैदान में उतारा जा सकता है। मंत्री व सपा के प्रदेश प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी का कहना है कि समाजवादी पार्टी पंचायत चुनावों पर पैनी नजर रख रही है। पार्टी के राज्य संसदीय बोर्ड ने जिला पंचायत अध्यक्ष पद का चुनाव लडऩे का फैसला किया है लेकिन ग्र्राम प्रधान से लेकर क्षेत्र पंचायत तक के दावेदारों पर पैनी निगाह रहेगी। सपा समर्थकों को पार्टी के पदाधिकारी रणनीति तैयार करने में पूरी मदद करेंगे।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ: पंचायत चुनाव को विधानसभा चुनाव की उल्टी गिनती मानकर रणनीति तैयार करने में जुटी समाजवादी पार्टी ने जातीय, क्षेत्रीय व युवा वोटरों के खांचे में फिट दावेदारों की तलाश में लगी है। पार्टी ने संगठन के ओहदेदारों से जिला पंचायत सदस्य पद पर ताल ठोंक रहे दावेदारों के बारे में रिपोर्ट मांगी है। सूत्रों का कहना है कि सप प्रधान पद के युवा प्रत्याशियों को समर्थन देने की रणनीति पर कार्य कर रही है।
लोकतंत्र की सबसे छोटी इकाई ग्राम पंचायतों के चुनाव खत्म होने के फौरन बाद विधान परिषद में स्थानीय निकाय कोटे की 36 सीटों का चुनाव होना है। उसके बाद विधानसभा चुनाव की आहट महसूस होने लगेगी। इससे वाकिफ समाजवादी पार्टी पंचायत चुनाव में दबदबा कायम कर विपक्षी दलों को गांव में पकड़ गहरी का संदेश देने की मुहिम में लगी है। वह अगर इस मकसद में कामयाब हुई तो निकाय कोटे की एमएलसी सीटों के उसके प्रत्याशियों की राह आसान होगी ही, विधानसभा चुनावों का माहौल बनाने में भी उसे मदद मिलेगी।
इसी रणनीति के तहत समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जिला इकाइयों से प्रधान, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत के दावेदारों का ब्यौरा मांगा है। जिलाध्यक्ष, क्षेत्रीय विधायक व मंत्रियों को पार्टी समर्थकों के बीच चुनावी टकराव रोकने का निर्देश दिया है। इसके साथ जिला पंचायत केप्रत्येक वार्ड के लिये प्रभारी व प्रेक्षक नियुक्त करने की भी तैयारी है। इनको मतदाताओं के बीच समीकरणों को दुरुस्त करने के तौर-तरीके समझाए जाएंगे। मसलन किस-किस तरह के सामाजिक समीकरणों में कैसे लोगों को चुनाव मैदान में उतारा जा सकता है। मंत्री व सपा के प्रदेश प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी का कहना है कि समाजवादी पार्टी पंचायत चुनावों पर पैनी नजर रख रही है। पार्टी के राज्य संसदीय बोर्ड ने जिला पंचायत अध्यक्ष पद का चुनाव लडऩे का फैसला किया है लेकिन ग्र्राम प्रधान से लेकर क्षेत्र पंचायत तक के दावेदारों पर पैनी निगाह रहेगी। सपा समर्थकों को पार्टी के पदाधिकारी रणनीति तैयार करने में पूरी मदद करेंगे।
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