10.09.2015
-दारुल उलूम ने कहा- दहशतगर्दी के खिलाफ दिया जा चुका है फतवा
-इस्लाम विरोधी ताकतों ने खड़ा किया आइएस संगठन
देवबंद : आतंक का पर्याय बन चुके आइएस के खिलाफ भारत के इस्लामी विद्वानों द्वारा दिए गए फतवे का देवबंदी उलेमा ने भी समर्थन करते हुए आइएस की करतूतों को गैर इस्लामी करार दिया है। मोहतमिम ने कहा है कि दारुल उलूम हर प्रकार की दहशतगर्दी के खिलाफ इस्लाम का मत फतवे के रूप में पहले ही दुनिया के सामने रख चुका है।
एक हजार से अधिक इस्लामिक विद्वानों और मुफ्तियों द्वारा आइएस के खिलाफ जारी फतवे को सही बताते हुए दारुल उलूम के मोहतमिम मुफ्ती अबुल कासिम नौमानी का कहना है कि दारुल उलूम 2008 में हर प्रकार की दहशतगर्दी के खिलाफ फतवा दे चुका है। यह फतवा पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है और पूरी दुनिया इसको मानती है। हम किसी एक दहशतगर्द तंजीम के खिलाफ नहीं बल्कि हर हर प्रकार की दहशतगर्दी के खिलाफ इस्लाम का मत फतवे के रूप में दुनिया के सामने रख चुके हैं। दारुल उलूम के वरिष्ठ उस्ताद मुफ्ती मोहम्मद आरिफ कासमी ने आइएस को इजराइल द्वारा मुसलमानों व इस्लाम को बदनाम करने के लिए खड़ा किया गया संगठन बताया। उन्होंने कहा कि आईएस की करतूतें पूरी तरह गैर इस्लामी हंै। आइएस की हरकतों से मुसलमान और इस्लाम पूरी दुनिया में बदनाम हो रहा है। आइएस की कयादत करने वाले मुसलमान है ही नहीं। बल्कि आइएस यहूदियों के कहा कि औरतों, बच्चों, बूढ़ों और किसी भी धर्म की धार्मिक हस्तियों को मारना और उनको नुकसान पहुंचाना अल्लाह और हजरत मोहम्मद साहब के बताए हुए उसूलों के खिलाफ है। आइएस के खिलाफ पूरी दुनिया का लामबंद होना जरूरी है।
प्रसिद्ध इस्लामी विद्वान और अल कुरान फाउंडेशन के अध्यक्ष मौलाना नदीमुल वाजदी ने कहा कि देवबंदी उलेमा पहले ही कह चुके हंै कि आइएस आतंक फैलाने का काम कर रहा है। आइएस जिस तेजी के साथ फैल रहा है और जिस अंदाज में काम कर रहा है, उसके पीछे बड़ी इस्लाम विरोधी ताकत है। आईएस मुस्लिम देशों को तबाह करने के लिए खड़ी की गई तंजीम है।
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-दारुल उलूम ने कहा- दहशतगर्दी के खिलाफ दिया जा चुका है फतवा
-इस्लाम विरोधी ताकतों ने खड़ा किया आइएस संगठन
देवबंद : आतंक का पर्याय बन चुके आइएस के खिलाफ भारत के इस्लामी विद्वानों द्वारा दिए गए फतवे का देवबंदी उलेमा ने भी समर्थन करते हुए आइएस की करतूतों को गैर इस्लामी करार दिया है। मोहतमिम ने कहा है कि दारुल उलूम हर प्रकार की दहशतगर्दी के खिलाफ इस्लाम का मत फतवे के रूप में पहले ही दुनिया के सामने रख चुका है।
एक हजार से अधिक इस्लामिक विद्वानों और मुफ्तियों द्वारा आइएस के खिलाफ जारी फतवे को सही बताते हुए दारुल उलूम के मोहतमिम मुफ्ती अबुल कासिम नौमानी का कहना है कि दारुल उलूम 2008 में हर प्रकार की दहशतगर्दी के खिलाफ फतवा दे चुका है। यह फतवा पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है और पूरी दुनिया इसको मानती है। हम किसी एक दहशतगर्द तंजीम के खिलाफ नहीं बल्कि हर हर प्रकार की दहशतगर्दी के खिलाफ इस्लाम का मत फतवे के रूप में दुनिया के सामने रख चुके हैं। दारुल उलूम के वरिष्ठ उस्ताद मुफ्ती मोहम्मद आरिफ कासमी ने आइएस को इजराइल द्वारा मुसलमानों व इस्लाम को बदनाम करने के लिए खड़ा किया गया संगठन बताया। उन्होंने कहा कि आईएस की करतूतें पूरी तरह गैर इस्लामी हंै। आइएस की हरकतों से मुसलमान और इस्लाम पूरी दुनिया में बदनाम हो रहा है। आइएस की कयादत करने वाले मुसलमान है ही नहीं। बल्कि आइएस यहूदियों के कहा कि औरतों, बच्चों, बूढ़ों और किसी भी धर्म की धार्मिक हस्तियों को मारना और उनको नुकसान पहुंचाना अल्लाह और हजरत मोहम्मद साहब के बताए हुए उसूलों के खिलाफ है। आइएस के खिलाफ पूरी दुनिया का लामबंद होना जरूरी है।
प्रसिद्ध इस्लामी विद्वान और अल कुरान फाउंडेशन के अध्यक्ष मौलाना नदीमुल वाजदी ने कहा कि देवबंदी उलेमा पहले ही कह चुके हंै कि आइएस आतंक फैलाने का काम कर रहा है। आइएस जिस तेजी के साथ फैल रहा है और जिस अंदाज में काम कर रहा है, उसके पीछे बड़ी इस्लाम विरोधी ताकत है। आईएस मुस्लिम देशों को तबाह करने के लिए खड़ी की गई तंजीम है।
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