Friday, 11 September 2015

तलाक पर कुरआन व हदीस का फैसला अंतिम : कुरैशी

३ सितम्बर-२०१५
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-सुन्नी उलमा काउंसिल के सुझाव को पसर्नल ला बोर्ड ने खारिज किया
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राज्य ब्यूरो, लखनऊ : आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने एक बार में तीन बार तलाक कहने से परिवार टूटने की दुश्वारियां दूर करने कीसुन्नी उलमा काउंसिल की मांग खारिज कर दी है। बोर्ड का मानना है कि कुरआन व हदीस की रोशनी में किए गए फैसले में फेरबदल नहीं हो सकता है।
काउंसिल ने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, देवबंद व बरेलवी उलमा को लिखे खत में मिस्र, सूडान, इराक का हवाला देते हुए कहा था कि इन मुल्कों में तलाक में तीन माह केअंतर का कानून है। काउंसिल के महामंत्री हाजी मोहम्मद सलीस का मानना है कि पति अपनी पत्नी को एक बार में तीन बार तलाक कहता है तो उसे तलाक न माना जाए बल्कि प्रत्येक माह के अंतर में तीन बार  तलाक कहने पर ही  उसे तलाक माना जाये। आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने काउंसिल की मांग व  तर्क को खारिज कर दिया है। बोर्ड के प्रवक्ता अब्दुररहीम कुरैशी ने हैदराबाद से फोन पर बताया कि तलाक पर कुरआन व हदीस की रोशनी से इतर कोई फैसला नहीं किया जा सकता है। हजरत मोहम्मद की सुन्नत की रोशनी में इस मुद्दे पर कोई चर्चा हो सकती है। पर्सनल लॉ बोर्ड अपने फैसले कुरआन की रोशनी में ही करता है। उनका कहना है कि इस तरह के मुद्दे उछालने से गुरेज किया जाना चाहिये।

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