Monday, 30 May 2016

सपा-रालोद गठजोड़ का पहली कोशिश पर ही ब्रेक

 'रालोद मुखिया अजित सिंह से बातचीत सकारात्मक रही, इसके अच्छे नतीजे सामने होंगे।Ó-शिवपाल यादव, प्रभारी उत्तर प्रदेश व महासचिव (संभल में)
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 'राजनीति व समाज में जिसकी विश्वसनीयता खत्म हो जाती है, उससे गठजोड़ नहीं हो सकता।Ó प्रो.रामगोपाल यादव, महासचिव समाजवादी पार्टी (फिरोजाबाद में)

लखनऊ : विधानसभा चुनाव से पूर्व भाजपा के खिलाफ रालोद (राष्ट्रीय लोकदल) के साथ गठबंधन की समाजवादी पार्टी (सपा) महासचिव शिवपाल यादव की पहली कोशिश पर ही दूसरे महासचिव प्रो.रामगोपाल यादव ने 'ब्रेकÓ लगा दिया है। यह पहल थमने की संभावना है। सपा महासचिवों की मुख्तलिफ राह के सियासी निहितार्थ ढूंढे जा रहे हैं।
रालोद लोकसभा चुनाव में खाता नहीं खुलने के 'दर्दÓ से परेशान है तो समाजवादी पार्टी विधानसभा-2017 से पहले ताकत में बढ़ोत्तरी की फिराक में है। सूत्रों का कहना है कि कुछ दिन पहले एक धर्मगुरु ने दोनों दलों के गठजोड़ का मंत्र दिया तो सपा महासचिव शिवपाल यादव ने अमल शुरू किया। पार्टी मुखिया मुलायम सिंह से गठजोड़ के नफा-नुकसान पर चर्चा की और माना गया कि गठजोड़ से जाट-मुस्लिम गोलबंदी में कामयाबी मिल सकती है।
सपा नेताओं की आपसी चर्चा के बाद रविवार को रालोद अध्यक्ष अजित सिंह मुलायम सिंह से मिलने दिल्ली स्थित उनके आपास पर पहुंचे। जहां उनकी राज्य की सियासी संभावनाओं पर चर्चा हुई। इस दौरान सपा महासचिव शिवपाल सिंह यादव, एमएलसी आशु मलिक भी मौजूद रहे।
एक दशक से भी अधिक समय के बाद सियासी कारणों से मुलायम-अजित मुलाकात में जिन बिन्दुओं पर चर्चा हुई, उसका दोनों ओर से खुलासा नहीं किया। शिवपाल यादव ने जरूर कहा कि किसानों की समस्या से लेकर कई मुद्दों पर चर्चा हुई है, परिणाम सामने आयेगा। इससे सपा के समर्थन से अजित सिंह को राज्यसभा भेजे जाने के कयास लगे, मगर रालोद ने खामोशी ओढ़े रखी।  सोमवार को विकास योजनाओं की समीक्षा करने संभल पहुंचे शिवपाल यादव ने कहा कि 'रालोद मुखिया अजित सिंह से बातचीत सकारात्मक रही, इसके अच्छे नतीजे सामने होंगे।Ó इस गठजोड़ की संभावना नजर आयी मगर कुछ देर बाद ही फिरोजाबाद में दूसरे महासचिव व 'थिंक टैंकÓ प्रो.राम गोपाल यादव ने गठजोड़ के प्रयासों पर ब्रेक लगाते हुए कहा कि 'राजनीति व समाज में जिसकी विश्वसनीयता खत्म हो जाती है, उससे गठजोड़ नहीं हो सकता।Ó इशारा रालोद की ओर था। उनकी टिप्पणी को सपा-रालोद गठजोड़ के प्रयासों पर ब्रेक के तौर पर देखा जा रहा है। दो महासचिवों के परस्पर विपरीत दिशा वाले बयान के निहितार्थ तलाशे जा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषक सपा में एक साथ कई वैचारिक धाराओं का उभार देख रहे हैं।
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पहले भी लगाया 'ब्रेकÓ
इससे पहले भी शिवपाल यादव ने 'जनता परिवारÓ को एक मंच पर खड़ा करने का प्रयास किया था और मुलायम सिंह यादव को जनता परिवार का मुखिया चुन लिया गया, मगर बिहार विधानसभा के चुनाव से पहले प्रो.राम गोपाल ने समाजवादी पार्टी के जनता परिवार से अलग होने की घोषणा कर दी और अपने बूते बिहार में चुनाव लडऩे का फैसला किया था।
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मगर जोखिम भी
जिन सौ विधानसभा सीटों को पश्चिम उत्तर प्रदेश का हिस्सा माना जाता है उनमें से चालीस पर समाजवादी पार्टी का कब्जा है, इस इलाके में साइकिल की रफ्तार तेज करने के लिए मुस्लिम और जाट दोनों के वोटों की ज़रूरत होगी। मगर मुजफ्फरनगर समेत पश्चिम के जिन जिलों फसाद हुआ है, वहां कई बार जाट-मुस्लिम ही आमने सामने रहे हैं, ऐसे में गठजोड़ जोखिम का भी सौदा हो सकता है। सूत्रों का कहना है कि रामगोपाल यादव ने जिस तरह से इस गठजोड़ के प्रयासों पर ब्रेक लगाया है, उससे अब गाड़ी आगे बढऩे की संभावना कम ही है।
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नई दिल्ली : उत्तर प्रदेश के निर्णायक विधान सभा चुनाव से पहले मायावती पर सीबीआई के दो नए केस दर्ज़ हो सकते हैं। ये केस नॉएडा के दलित प्रेरणा स्थल पार्क और नॉएडा में एक नए लैंड स्कैम से जुड़े हैं। सूत्रों के मुताबिक केस दर्ज़ करने की फाइल सीबीआई की जॉइंट डायरेक्टर नीना सिंह के पास है जिस पर अंतिम फैसला मोदी सरकार को लेना होगा। 

दो नए मामलों में मायावती कि खिलाफ मिले हैं साक्ष्य 

सूत्रों के मुताबिक नॉएडा के गिरफ्तार चीफ इंजीनियर यादव सिंह के घर और दफ्तर में छापों के दौरान सीबीआई को कुछ अहम दतावेज़ मिले थे। ये दस्तावेज़ पैसों के कुछ संदेहास्पद हस्तांतरण को लेकर थे। इन दस्तावेज़ों की जब जांच की गयी तो मामला 650 करोड़ की लागत वाले नॉएडा के प्रेरणा स्थल पार्क का निकला। ऐसी ही एक और फाइल की जांच से नॉएडा के एक और लैंड स्कैम का खुलासा हुआ। सूत्रों के मुताबिक इन दोनों मामलों में मायावती और उनके भाई की भूमिका उजागर हुई है। 

अमित शाह सीबीआई कि ज़रिये घेरना चाहते  हैं मायवती को 

ऐसा बताया जाता है कि मायावती के खिलाफ मिले नए सबूतों को लेकर मुकदमा दर्ज़ कराने का अब दबाव सीबीआई के डायरेक्टर अनिल सिन्हा पर है।  दरअसल बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह चाहतें है कि जब तक मायावती के सर पर जेल जाने  की तलवार नही लटकेगी तब तक वो यूपी में गठबंधन करने के लिए तैयार नही होंगी। बीजेपी इन मुकदमों का राजनीतिक लाभ उठाकर मायवती को यूपी में गठबंधन के लिए मज़बूर कर सकती है। पार्टी के कुछ नेताओं का मानना है कि मोदी सरकार की गिरती साख के कारण यूपी बीजेपी के हाथ से निकलता दिख रहा है। अग़र मायवती के साथ गठबंधन  हो जाए तो बीजेपी यूपी में सत्ता में लौटकर केंद्र सरकार की साख भी कुछ हद तक बचा सकती है। 

बीजेपी को अब यूपी में गठबंधन की ज़रुरत
बहरहाल प्रेरणा स्थल पार्क और नॉएडा लैंड स्कैम में मुकदमा दर्ज़ करने में एक रोड़ा खुद सीबीआई के अफसर है। एक तरफ जॉइंट डायरेक्टर नीना सिंह  और अनिल सिन्हा इस मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज़ करना चाहते हैं लेकिन डीआईजी एन एम सिंह और एसपी अशोक बाबू  का मानना है की मायवती के खिलाफ सीधे और पुख्ता साक्ष्य नही है। सूत्रों के मुताबिक मायावती को सीधे न नामजद करके सीबीआई अब केंद्र के कुछ अज्ञात अफसरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज़ कराना चाहते है।  ऐसा बताया जाता है की प्रेरणा स्थल पार्क को क्लियरेंस देने में केंद्रे सरकार के कुछ अफसरों का रोल था। इसके अलावा सीबीआई नए तथ्यों के आधार पर यूपी सरकार को भी जांच करने के लिख सकती है।  

शाह और सिन्हा कि बीच रिश्तों का किया अधिकारी ने खंडन 

दूसरी तरफ सीबीआई के एक अधिकारी ने इंडिया संवाद को बताया कि मायावती पर NRHM केस में तो पूछताछ हुई है पर यादव सिंह घोटाले में अब तक कोई करवाई नही हुई है। इस अधिकारी ने कहा कि यादव सिंह मामले की जांच में तत्कालीन सरकार के खिलाफ कुछ तथ्य ज़रूर मिले  थे लेकिन मायावती  पर मुकदमा दर्ज़ करने की बात सामने नही आई है। इस अधिकारी ने अमित शाह और सीबीआई के डायरेक्टर  अनिल सिन्हा के बीच किसी रिश्ते का भी खंडन किया है।  ( )

Saturday, 3 October 2015

मधेशी चाहें मोदी का दखल



BY---ANAND RAI...

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मधेशी चाहें मोदी का दखल

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हाइलाइटर
नेपाल में भारत से जाने वाली खाद्य सामग्री, डीजल, पेट्रोल और घरेलू गैस की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। महाराजगंज जिले के सम्पतिहा से सोनौली तक करीब 16 किलोमीटर तक माल लदे ट्रकों की कतार बन गयी है। नेपाल में पेट्रोल तीन सौ से चार सौ रुपये लीटर बिक रहा है जबकि नेपाली मुद्रा में प्याज दो सौ रुपये किलो बिक रही है।
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-भारत का विरोध बढ़ा पहाड़ के नेपालियों में
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बेलहिया (नेपाल) : नेपाल में नए संविधान के विरोध में मधेशियों के आंदोलन का रंग अब ज्यादा चटख होने लगा है। इस आंदोलन से भारत-नेपाल के व्यापारिक और राजनीतिक रिश्तों में खटास का खतरा भी बढ़ गया है। भारतीयों से रोटी-बेटी का रिश्ता रखने वाले मधेशी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से इस मामले में सीधा हस्तक्षेप चाहते हैं जबकि पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले नेपाली मूल के लोगों को अंदेशा है कि मधेशियों को भारत की ओर से हवा मिल रही है।
 मंगलवार को नेपाल के रुपंदेही जिले की बेलहिया चौकी पर यह नजारा साफ देखने को मिला। मधेशियों का एक जत्था जैसे ही धरने पर बैठा, उन पर ईंट-पत्थर चलने लगा। नो मैंस लैंड के इस पार भारतीय सीमा पर मधेशी और नेपाल सीमा पर पहाडिय़ों के बीच करीब बीस मिनट तक जमकर पथराव हुआ। पहाड़ी मूल के नेपाली भारत के विरोध में नारे भी लगा रहे थे जबकि सोनौली की ओर से जवाबी पत्थर फेंकने में कुछ भारतीयों के भी हाथ शामिल थे। अभी कुछ माह पहले नेपाल की भूकंप त्रासदी में भारत सबसे बड़ा मददगार था। तब सर्वाधिक लाभ पहाड़ी इलाकों में रहने वालों ने ही उठाया। त्रासदी से उबर रहे नेपाल के लिये अमन-चैन की जरूरत है लेकिन नस्लभेद में वहां छिड़ी रार उनके विकास की दुश्मन बन गयी है। हालत यह है कि दोनों देशों की सीमाओं पर आवागमन ठप है। पहाड़ी मूल के अमर थापा मानते हैं कि इसका कुप्रभाव पड़ रहा है। लुंबिनी के सांसद कमलेश्वर पुरी कहते हैं कि संविधान संशोधन नहीं हुआ तो हालात और खराब होंगे। जन जीवन अस्त-व्यस्त हो जायेगा।
पहाड़ी मूल के नेपाली भारत पर इसलिये शक कर रहे हैं क्योंकि मधेशियों का रंग, बोली, भाषा, रहन-सहन और रिवाज भारतीयों से मिलते हैं। इस रंग भेद में पहाड़ और मैदान एक दूसरे के खिलाफ तन गये हैं। शायद इसी भावना के चलते मंगलवार को पहाड़ी नेपालियों ने बेलहिया सीमा पर भारत के विरोध में खूब नारे लगाये। मधेशियों को नेपाल के नये संविधान में सात राज्यों के गठन और नागरिकता के लिये बनाये गये नियम-कानून में खोट नजर आ रहा है। इसी के खिलाफ 51 दिनों से उनका आंदोलन निरंतर तेज हो रहा है। भूकंप की त्रासदी से उबर रहे नेपाल के लिये यह आंदोलन किसी बड़े झटके से कम नहीं है। नेपाल के बुद्धिजीवी वर्ग में इसको लेकर चिंता भी देखी है। नेपाल के वरिष्ठ पत्रकार युवराज घिमिरे कहते हैं कि यह बहुत जटिल मामला है। मधेशियों की कुछ मांग जायज हैं तो कुछ नाजायज क्योंकि उनकी अगुवाई करने वाले सिर्फ सुविधा की राजनीति कर रहे हैं।
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मधेशी मोर्चा लड़ेगा निर्णायक लड़ाई
नए संविधान के खिलाफ नेपाल के तराई इलाकों में सक्रिय राजनीतिक दलों ने मोर्चा बनाकर युद्ध छेड़ दिया है। संघीय लोकतांत्रिक मधेशी मोर्चा के बैनर तले तराई मधेश लोक तांत्रिक पार्टी के अध्यक्ष महंथ ठाकुर, उपाध्यक्ष हृदयेश त्रिपाठी, संघीय समाजवादी फोरम नेपाल के अध्यक्ष उपेन्द्र यादव, सद्भावना पार्टी के राजेन्द्र महतो और तराई मधेश सद्भावना पार्टी के महेन्द्र राय यादव इस लड़ाई की अगुवाई कर रहे हैं। नेपाल के पूर्व मंत्री हृदयेश त्रिपाठी और मोर्चा संयोजक महेन्द्र यादव कहते हैं कि मोदी जी को इसमें हस्तक्षेप कर संविधान में परिवर्तन के लिये सीधी पहल करनी चाहिये। उनका कहना है कि हम संविधान में बदलाव तक अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।
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मधेशी साम्राज्य 22 जिलों में
नेपाल में तराई के 22 जिलों में मधेशियों का साम्राज्य फैला है। झापा, मोरंग, सुनसारी, परसा, इटहरी, सप्तरी, सिरहा, रौतहट, मोहतरी, धनुषा, बारा, सरलाही, चितवन, नवलपरासी, रुपंदेही, दांग, बांके, बरदिया, कंचनपुर और कैलाली जिलों में रहने वाले सांवले रंग और बिल्कुल भारतीयों की तरह दिखने वालों को मधेशी कहते हैं। नेपाल की करीब पौने तीन करोड़ आबादी में 37 फीसद हिस्सेदारी मधेशियों की है।
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भारतीयों का प्रवेश मुश्किल
आंदोलन का असर यह है कि नेपाल में भारतीयों के प्रवेश पर पहाडिय़ों की ओर से हाथापाई की जा रही है और उनके भारत आने पर इस ओर भी यही हाल है। आंदोलन की चक्की में कारोबारी पिस रहे हैं। दोनों तरफ से आवागमन ठप है। सिर्फ सोनौली बार्डर से प्रतिदिन करीब तीन सौ ट्रक खाद्य सामग्री, डीजल-पेट्रोल और घरेलू गैस आदि लेकर नेपाल जाते थे। हिमाचल प्रदेश से सेबों का ट्रक लेकर चले मुहम्मद नाजिर और शिमला के राजकुमार परेशान हैं। सात दिन में उनका सेब पानी छोडऩे लगा है। इन्हें कोई उपाय नहीं दिख रहा है। आगरा के रामतेज ट्रक मे आलू और राम सकल प्याज लेकर सात दिनों से पड़े हैं। चेन्नई, हरियाणा, दिल्ली समेत कई राज्यों के कारोबारी, ट्रक चालक और कर्मचारी भूख-प्यास से छटपटा रहे हैं पर उनका कोई पुरसाहाल नहीं है।

---- इनसेट ----
--गांधी की राह पर मधेसी
नए संविधान में वजूद बरकरार रखने के लिए आंदोलित मधेसी अब महात्मा गांधी की राह पकड़ेंगे। गांधी जयंती पर 12 लाख से अधिक मधेसी करीब 1155 किलोमीटर लम्बी मानव श्रंखला बनाकर अपने हक की आवाज सत्याग्रही अंदाज में बुलंद करेंगे।  संघीय लोकतांत्रिक मधेसी मोर्चा ने विरोध का अङ्क्षहसक रास्ता अपनाते हुए तराई क्षेत्र के 22 जिलों में गांधीगिरी का संदेश देना शुरू किया है। नेपाल सरकार के पूर्व मंत्री हृदयेश त्रिपाठी का दावा है कि झापा से महाकाली तक बनने वाली मानव श्रंखला में 37 प्रतिशत मधेसियों का प्रतिनिधित्व रहेगा।
गत 51 दिनों से पनपे संविधान विरोधी आंदोलन में तराई क्षेत्र के 22 जिलों का माहौल गर्माया हुआ है। मधेसियों की घनी आबादी वाले झापा, कंचनपुर, कैडलाली, सुनसरी, मोरांग, परसा, ईटहरी, तिरहा, बारा, धनुषा, चितवन, रोहताश, मोहतरही, सरलाई, रूपनदेही, ढांग, बांके, सैलाली व नवल पतसई आदि जिलों में प्रचार- प्रसार जोर पकड़े है।
 
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30.09.2015
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पिपरहवो हमार, नौतनवों हमार
नोट- स्टोरी के साथ प्रयोग के लिए लोगो 30यूपीडी-जी1 में जारी किया गया है।
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-नेपाल में बदल रहे रिश्तों के समीकरण
-चीन के प्रति मधेशियों में भड़क रहा गुस्सा
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पिपरहवा (नेपाल) : नेपाल के नए संविधान के विरोध में जारी मधेशी आंदोलन से रिश्तों के समीकरण बदल रहे हैं। पहाड़ में रहने वाले नेपालियों का झुकाव चीन की तरफ बढ़ रहा है जबकि तराई में बसने वाले मधेशी भारतीयों से गांठ मजबूत करने लगे हैं। इस कारण नेपाल दो हिस्सों में बंटा दिख रहा है। स्वाभाविक है तीनों देशों पर इसका सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक प्रभाव पडऩा तय है।
 नेपाल के रुपनदेही जिले के करीब 130 घरों वाले मधेशी बहुल पिपरहवा गांव के लोगों ने जबसे सुना कि भारत से बहू लाने पर सात साल के इंतजार के बाद उसे नेपाल की नागरिकता मिलेगी, तबसे उनका गुस्सा भड़क गया है। गांव के कक्षा आठ तक पढ़े नगेसर और गोरखनाथ कुर्मी कहते हैं कि हमारे रोटी-बेटी के रिश्तों पर अंकुश लगाने के लिए नागरिकता का नया नियम चीन की साजिश से बनाया गया है। पिपरहवा और आस-पास के गांवों के हर घर में भारतीय परिवारों के बेटे-बेटियों की शादी हुई है। साठ साल पहले नौतनवां के पास के एक गांव से ब्याह कर पिपरहवा गयीं भूला देवी नागरिकता की बात तो नहीं समझतीं लेकिन बड़े दम से कहती हैं कि 'पिपरहवो हमार, नौतनवों हमारÓ। असल में जब भूला का ब्याह हुआ तो उन्हें नेपाल और भारत की जगह सिर्फ इतना पता था कि मायके से कोस भर की दूरी पर ससुराल है, लेकिन बदले हालात में दोनों देशों की दूरी उन्हें समझ में आ गयी है। इसी गांव में 12 वर्ष पहले ब्याही गयी महराजगंज की शर्मिला कहती हैं कि अगर भारत से रिश्तेदारी के लिए नियम कानून बनेंगे तो चल नहीं पायेंगे।
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  अगड़ों-पिछड़ों की दूरी कम मधेशी बहुल गांवों में निरक्षर भी नियम कानूनों के प्रभाव-दुष्प्रभाव से वाकिफ होने लगे हैं। पिपरहवा से एक मील के हेरफेर में ठरका, भिलरहवा, बैरिहवां, ठरकी, हड़सरी और नौडिहवा जैसे गांवों में कुर्मी, धोबी, मुसलमान, अनुसूचित जाति, यादव, ब्राह्मण और कुछ क्षत्रिय बसे हैं। कुछ वर्ष पहले यह इलाका माओवादी आंदोलन से प्रभावित था। तब अगड़ी और पिछड़ी जातियों के बीच दूरी थी लेकिन वह दीवार अब गिर गयी है। इन सभी को लगता है कि माओवादी आंदोलन भी चीन की साजिश से ही भड़का। माओवादी आंदोलन के दौरान इन गांवों से ज्यादातर सवर्णों ने पलायन कर उत्तर प्रदेश के महराजगंज और गोरखपुर जिलों में ठौर-ठिकाना बनाया जबकि पिछड़ी जाति के लोग गांवों में ही रह गये। उप्र की सीमा पर तैनात सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) गांवों में रहने वाले मधेशियों को तब शक की निगाहों से घूरता था। अब एसएसबी का रुख नरम है।
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नई राह बना रहे मधेशी
नौतनवां से करीब दो किलोमीटर आगे पहाड़ों से निकली डंडा नदी बहती है। यह नदी भारत-नेपाल की सरहद तय करती है। धीमे बहाव वाली नदी में घुटनों तक पानी के बीच उस पार जाने को कई गांव वाले आते-जाते मिले। माओवादी आंदोलन के दौरान एसएसबी ने इस नदी से बांस का पुल हटवा दिया था। तबसे गांव वाले नदी पारकर भारत की सीमा में व्यापार व दवा के लिए आते हैं। यहां वाहन ले जाने पर रोक है। बनगाई से मर्चवार क्षेत्र होते हुए करीब 35 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद वाहन लेकर पिपरहवा जाया जा सकता है लेकिन मधेशियों के प्रति एसएसबी का रुख नरम होने से गांव वालों का उत्साह बढ़ा है। नतीजा है कि डंडा नदी पर अरसे बाद बांस का पुल बनाने की तैयारी शुरू है। पिपरहवा गांव के रामचंद्र, रामराज, सूरज रामकिशुन, श्याम बिहारी समेत कई लोग बांस-बल्ली जुटाने में लगे हैं।
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 शादियों की सियासत में मधेशी भी कम नहीं
नए संविधान में विदेशी महिला से शादी किये जाने पर सात वर्ष बाद नागरिकता दिये जाने के प्रावधान से भले उबाल आ गया है लेकिन नेपाल में शादियों की सियासत में मधेशी भी पीछे नहीं हैं। नये संविधान के विरोध में जिन बड़े मधेशी नेताओं ने मोर्चा खोला है उनमें ज्यादातर नेताओं ने अपनी शादी पहाड़ में की है। आम मधेशी इस बात की चर्चा करना नहीं भूलता कि सुरक्षा और दांव-पेंच के लिए ही इन नेताओं ने पहाड़ में अपनी शादी रचाई। नए संविधान के विरोध में चल रहे आंदोलन में सबसे प्रभावी नाम नेपाल सरकार के पूर्व मंत्री हृदयेश त्रिपाठी का है। त्रिपाठी की शादी पहाड़ी मूल में हुई। इनके अलावा पूर्व मंत्री ओमप्रकाश यादव गुलजारी और मर्चवार क्षेत्र के सांसद सर्वेन्द्र नाथ शुक्ल ने भी पहाड़ी मूल की लड़की से शादी की है। मधेशी आंदोलन में सक्रिय पूर्णमासी और रामचंद्र कहने में संकोच नहीं करते कि हमारे नेता लोग अपनी सुरक्षा और सियासत के लिए दोनों तरफ अपने लाभ का रास्ता बनाते हैं।
(आनंद राय की लेखनी से साभार)
  

बिहार की पिच पर सपा की युवा ब्रिगेड

30.09.2015
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-सियासी उतार-चढ़ाव का तजुर्बा दिलाना मुख्य उद्देश्य
-बिहार के तजुर्बे का इस्तेमाल उप्र में करने की मंशा
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परवेज अहमद, लखनऊ : सरकार और प्रदेश संगठन की कमान युवा हाथों में सौंप चुकी समाजवादी पार्टी ने अब नौजवान ब्रिगेड को सियासी उतार-चढ़ाव का तजुर्बा लेने के लिए बिहार की पिच पर उतारा है। पार्टी की सोच है कि बिहार का चुनावी अनुभव उत्तर प्रदेश में काम आएगा।
महागठबंधन से अलग होकर नया मोर्चा गठित करने वाली समाजवादी पार्टी ने युवा संगठन के ओहदेदारों को बिहार का सियासी पारा परखने और वहां की सियासी पिच पर 'बैटिंगÓ के नए प्रयोग की आजादी भी दी है। पार्टी नेतृत्व जानता है कि बिहार विधानसभा चुनाव में उसका कुछ भी दांव पर नहीं है क्योंकि पार्टी ने अब तक बिहार में जितने भी चुनाव लड़े, उनमें सबसे अधिक 2.5 फीसद वोट उसे वर्ष 2005 में मिले थे। इस वोट प्रतिशत के साथ दो सीटें भी उसके खाते में आ गयी थीं। मगर वर्ष 2010 के चुनाव में सपा का वोटों का प्रतिशत  0.6 फीसद तक पहुंच गया। ऐसे में इस चुनाव में भी सपा चमत्कार की उम्मीद नहीं कर सकती मगर बिहार चुनावों के बाद उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनावों का आहट तेज होगी और तब यही तजुर्बे उसके काम आयेंगे।
सपा के एक रणनीतिकार का कहना है कि सियासत का तौर-तरीका भी अब बदल रहा है। बिहार विधानसभा चुनाव में तकनीक के साथ रणनीति के कौशल की भी परीक्षा होनी है और सपा की युवा ब्रिगेड को इसे समझने का मौका मिलेगा। पार्टी ने छात्र सभा के प्रदेश अध्यक्ष अतुल प्रधान, युवजन सभा के प्रदेश अध्यक्ष बृजेश यादव, लोहिया वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप तिवारी और मुलायम सिंह यूथ ब्रिगेड के प्रदेश अध्यक्ष मो.एबाद, लोहिया वाहिनी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष आनंद भदौरिया, युवजन सभा के पूर्व अध्यक्ष सुनील यादव 'साजनÓ, मत्स्य निगम के अध्यक्ष राजपाल कश्यप को उनकी टीम के साथ बिहार चुनाव में जुटने का निर्देश दिया है। इन लोगों से सोशल मीडिया पर होने वाले 'युद्धÓ पर पैनी नजर रखने के लिए कहा गया है। सूत्रों का कहना है कि जिन सपा नेताओं के  परिवार के सदस्य यूपी पंचायत चुनाव में प्रत्याशी हैं, उन्हें बिहार नहीं भेजा रहा है। समाजवादी पार्टी के प्रदेश महासचिव व राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अरविंद सिंह गोप का कहना है कि यह वर्ष 2017 केविधानसभा चुनाव के पूर्वाभ्यास का है। 

Friday, 11 September 2015

...तो खाली रहेंगी परिषद की एक तिहाई सीट

31 अगस्त-2015

 लखनऊ: पंचायत चुनावों के चलते राज्य में पहली बार विधान परिषद की एक तिहाई सीटें कुछ समय रिक्त रहने के आसार हैं। दरअसल, स्थानीय प्राधिकारी क्षेत्र के 35 सदस्यों का जनवरी-2016 में कार्यकाल खत्म होगा, इस पद के नये चुनाव के मतदाताओं यानी प्रधान, बीडीसी व जिला पंचायत सदस्य के निर्वाचन की प्रक्रिया संभवत: पूरी नहीं हो पायेगी।
 सौ सदस्यों वाली राज्य विधान परिषद में एक तिहाई सदस्य (एमएलसी) स्थानीय प्राधिकारी क्षेत्र के निर्धारित हैं। प्राधिकारी क्षेत्र की सीटों के चुनाव में प्रधान, बीडीसी, जिला पंचायत सदस्य, निकायों के निर्वाचित प्रतिनिधि वोटर होते हैं। इत्तिफाक से कोटे की 35 सीटें 16 जनवरी 2016 को रिक्त हो जाएंगी।  चुनाव आयोग के नियम कहते हैं कि सीटों के रिक्त होने के 50 दिन पहले चुनावी प्रक्रिया शुरू होनी चाहिये। इस लिहाज से नवंबर के दूसरे हफ्ते में ही प्राधिकारी क्षेत्र की सीटों के चुनाव की प्रक्रिया शुरू होनी चाहिए। मगर इस बार उस समय राज्य में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव हो रहे होंगे, ऐसे में चुनाव आयोग के पास दो विकल्प होंगे। एक,पुराने सदस्यों को वोटर मानकर चुनाव कराये। दूसरा, पंचायत चुनाव का परिणाम आने का वह इंतजार करे।
विशेषज्ञों का कहना है कि फिर से चुनावी मैदान में कूद चुके पुराने प्रतिनिधियों को मतदाता मानकर चुनाव कराना किसी भी स्थिति में नैतिक नहीं होगा। नये वोटरों के जरिये एमएलसी चुनाव का विकल्प ज्यादा बेहतर होगा। दूसरा विकल्प चुने जाने पर विधान परिषद में स्थानीय प्राधिकारी क्षेत्र की एक तिहाई सीटें कुछ अरसे तक खाली रह सकती हैं। जानकारों का कहना है कि ऐसा पहली बार होगा जब राज्य में पंचायत चुनाव के चलते एमएलसी (स्थानीय प्राधिकारी क्षेत्र) के चुनाव टल सकते हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी अरूण सिंहल का कहना है पूरी परिस्थितियों पर विचार किया जा रहा है। भारत निर्वाचन आयोग को हालात की जानकारी दी गयी है। आयोग के निर्देशों के अनुरूप कार्रवाई की जायेगी।
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कब-किसका कार्यकाल खत्म होगा
-क्षेत्र पंचायत सदस्य (बीडीसी): 17 मार्च 2016
-ग्राम प्रधान:                    7 नवम्बर 2015
-जिला पंचायत सदस्य:         13 जनवरी 2016
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 एमएलसी सीटों का कार्यकाल
विधान परिषद (स्थानीय प्राधिकारी क्षेत्र)की 35 सीटें 16 जनवरी 2016 को रिक्त होंगी। इन सीटों के चुनाव में प्रधान, बीडीसी, जिला पंचायत व निकाय के निर्वाचित पदाधिकारी वोट डालते हैं।
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विधान परिषद में दलीय स्थित
बसपा: 46, सपा: 29, भाजपा: सात, कांग्रेस: दो, शिक्षक दल: पांच, निर्दल समूह: चार, रालोद: एक, रिक्त सीटें: छह

...पत्नी से ज्यादा प्यार करना चाहिये: अखिलेश

28 अगस्त-२०१५
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-मुख्यमंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिभाशाली लोगों को सम्मानित किया
-पत्नी की याद में ताज बनाने वाले की सपा करेगी मदद
लखनऊ : विरोधियों की चाल पर 'बुद्धिदांवÓ के इस्तेमाल की चुनौती, विकास का रथ बढ़ाने की कठिन डगर पार करने में जुटे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के सामने मोहब्बत का जिक्र छिड़ा तो वह भी उसमें शरीक हो गए। कहा कि 'हर इंसान को पत्नी को ज्यादा प्यार करना चाहिये।Ó फिर कहा पत्नी की याद में बुलंदशहर में 'ताजÓ बनवा रहे फैजुल कादरी की तमन्ना पूरी करने में समाजवादी पार्टी से उनकी मदद करायी जायेगी।
 खेल, साहित्य, विज्ञान के क्षेत्र के प्रतिभाशाली शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास पर जुटे थे। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी इसमें शरीक थे। उन्होंने सरकारी सेवा से सेवानिवृत 79 वर्षीय फैजुल कादरी का पत्नी के प्रति समर्पण व मोहब्बत जज्बा सुना और समझा भी...इस रूमानी गुफ्तगू को बढ़ाया फैजाबाद के सात साल के कवि मृगेंद्र राज पांडेय ने जिन्होंने डिंपल यादव की तारीफ लिखा कविता सुनी, जिसके बोल कुछ यूं थे- 'लक्ष्मी-सरस्वती का मिश्रण, डिंपल जैसी साथी है। इस महिला को देखकर, चौड़ी होती छाती है।Ó ऐसे माहौल में बोलने खड़े हुए मुख्यमंत्री ने विकास की योजनाएं गिनाने के साथ ही यह भी कहा कि 'हर किसी को पत्नी से ज्यादा प्यार करना चाहिये।Ó
 हमारे बीच हैं रीयल हीरो
अखिलेश ने कहा कि हमारे ताज की शान निराली है। इससे हजारों की रोजी-रोटी चल रही है। फैजुल के ताज को बढ़ाने का प्रयास होगा। कहा कि लोग बाहर से बड़े हीरो तलाशते हैं, जबकि हमारे बीच में न जाने कितने हीरो हैं। जरुरत उन्हें पहचानने की है।
 हादसों में मदद करने वालों का सम्मान
मुख्यमंत्री ने सड़क हादसे में घायल के मददगार सिपाही कीर्ति प्रकाश ओझा, रजनीश राठौर, हेम बाबू निगम और उदय कुमार साहू को 11-11 हजार रुपए नकद और प्रशस्ति पत्र दिया। उन्होंने कहा कि घायलों की सहायता कर मिसाल पेश की है।
तरीका तलाशने को कमेटी बनी
सड़क हादसों को रोकने पर विचार होना चाहिये। सरकार ने इसके लिये एक कमेटी गठित की है। मुख्यमंत्री ने बताया कि होली के दिन नेताजी (मुलायम सिंह) कहीं से लौट रहे थे। रास्ते में उन्हें ट्रक के नीचे एक आदमी फंसा दिखा और सड़क पर उसकी पत्नी रोती दिखी। नेताजी ने उससे पूछा कि कहां इलाज कराना चाहती हो? केजीएमयू के नाम लेते ही उन्होंने अपनी गाड़ी से उसे अस्पताल भेजा। जिससे उसकी जान बच गयी। उन्होंने लोगों का आह्वïान किया कि घायलों को अस्पताल पहुंचाने में बिलकुल नहीं हिचकें।
ये भी हुए सम्मानित
मुख्यमंत्री ने हवा से चलने वाला इंजन तैयार करने वाले बागपत निवासी हामिद सैफी, स्पीडब्रेकर से बिजली बनाने वाले सुल्तानपुर निवासी आनंद पांडेय, ड्राइवर के बिना मेट्रो चलाने के लिए हसन रजा खान, फायर और थेफ्ट सेफ्टी अलार्म के लिए वंश चतुर्वेदी व कवि मृगेंद्र को भी सम्मानित किया। उन्होंने मृगेन्द्र की किताब का भी विमोचन किया।
 ब्लैक बेल्ट की मानद उपाधि
इंटरनेशनल कुंग-फू के उपाध्यक्ष जे पी त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री को ब्लैक बेल्ट की मानद उपाधि दी। इस मौके पर प्रमुख सचिव सूचना नवनीत सहगल ने उन्हें एक तलवार भेंट की।
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सेवानिवृत पोस्टमास्टर हैं फैजुल
राब्यू, लखनऊ: बुलंदशहर के कसेर निवासी व सेवानिवृत पोस्टमास्टर फैजुल कादरी बताते हैं कि दिसंबर 2011 में मौत से पहले पत्नी तज्जमुल बेगम ने उनसे कहा था कि 'मौत के बाद उन्हें कोई याद करने वाला नहीं होगा।Ó एक ऐसी इमारत बनवाई जाए, जिसके जरिये लोग उन्हें याद रखें। उन्होंने पत्नी से मिनी ताज बनवाने का वादा किया था। फरवरी 2012 में उनकी मौत के बाद उन्होंने मोहब्बत को यादगार बनाने के लिये ताज बनाने का कार्य शुरू किया था। इसकी जानकारी मिलने पर मुख्यमंत्री ने बुलंदशहर की डीएम बी.चन्द्रकला के जरिये फैजुल को लखनऊ बुलाकर सम्मानित किया।

17 और मदरसों को मिलेगा सरकारी अनुदान

25 अगस्त २०१५



 लखनऊ: प्रदेश सरकार ने आलिया स्तर के 17 और मदरसों को सरकारी मदद देने की फैसला लिया है। इससे तीन माह के दौरानअनुदान सूची में शामिल मदरसों की संख्या 92 हो गयी है।
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग से जारी शासनादेश में गुलजारे हिन्द मरकज उन्नाव, दारूल उलूम जिया-ए-मुस्तफा कानपुर नगर, मदरसा लखनऊ कैम्ब्रिज स्कूल, फात्मा गल्र्स कालेज बहराइच, मदरसा जामिया मोमिना लिलबनात जौनपुर, दारूल उलूम बरवा, हाटा कुशीनगर, मुहम्मदिया फैजेरसूल कुशीनगर, जामिया उस्मानिया गल्र्स हाईस्कूल कुशीनगर, नियाजिया कादिरिया फैजाबाद, मूरूल हुदा बिजलीपुरा शाहजहांपुर, शेख साहबजादा दारूल उलूम देवरिया, अरबिया रजाउल इस्लाम देवरिया, मिस्बाहुल उलूम नानपारा बहराइच, उमर आसिम लिलबनात जौनपुर, मदरसा फारूकिया वाराणसी, मदरसा समदानिया इस्लामिया जौनपुर को अनुदान सूची में शामिल किया गया है। इससे दो माह पहले सरकार ने 75 मदरसों को अनुदान सूची में शामिल करने का निर्णय लिया था।