'रालोद मुखिया अजित सिंह से बातचीत सकारात्मक रही, इसके अच्छे नतीजे सामने होंगे।Ó-शिवपाल यादव, प्रभारी उत्तर प्रदेश व महासचिव (संभल में)
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'राजनीति व समाज में जिसकी विश्वसनीयता खत्म हो जाती है, उससे गठजोड़ नहीं हो सकता।Ó प्रो.रामगोपाल यादव, महासचिव समाजवादी पार्टी (फिरोजाबाद में)
लखनऊ : विधानसभा चुनाव से पूर्व भाजपा के खिलाफ रालोद (राष्ट्रीय लोकदल) के साथ गठबंधन की समाजवादी पार्टी (सपा) महासचिव शिवपाल यादव की पहली कोशिश पर ही दूसरे महासचिव प्रो.रामगोपाल यादव ने 'ब्रेकÓ लगा दिया है। यह पहल थमने की संभावना है। सपा महासचिवों की मुख्तलिफ राह के सियासी निहितार्थ ढूंढे जा रहे हैं।
रालोद लोकसभा चुनाव में खाता नहीं खुलने के 'दर्दÓ से परेशान है तो समाजवादी पार्टी विधानसभा-2017 से पहले ताकत में बढ़ोत्तरी की फिराक में है। सूत्रों का कहना है कि कुछ दिन पहले एक धर्मगुरु ने दोनों दलों के गठजोड़ का मंत्र दिया तो सपा महासचिव शिवपाल यादव ने अमल शुरू किया। पार्टी मुखिया मुलायम सिंह से गठजोड़ के नफा-नुकसान पर चर्चा की और माना गया कि गठजोड़ से जाट-मुस्लिम गोलबंदी में कामयाबी मिल सकती है।
सपा नेताओं की आपसी चर्चा के बाद रविवार को रालोद अध्यक्ष अजित सिंह मुलायम सिंह से मिलने दिल्ली स्थित उनके आपास पर पहुंचे। जहां उनकी राज्य की सियासी संभावनाओं पर चर्चा हुई। इस दौरान सपा महासचिव शिवपाल सिंह यादव, एमएलसी आशु मलिक भी मौजूद रहे।
एक दशक से भी अधिक समय के बाद सियासी कारणों से मुलायम-अजित मुलाकात में जिन बिन्दुओं पर चर्चा हुई, उसका दोनों ओर से खुलासा नहीं किया। शिवपाल यादव ने जरूर कहा कि किसानों की समस्या से लेकर कई मुद्दों पर चर्चा हुई है, परिणाम सामने आयेगा। इससे सपा के समर्थन से अजित सिंह को राज्यसभा भेजे जाने के कयास लगे, मगर रालोद ने खामोशी ओढ़े रखी। सोमवार को विकास योजनाओं की समीक्षा करने संभल पहुंचे शिवपाल यादव ने कहा कि 'रालोद मुखिया अजित सिंह से बातचीत सकारात्मक रही, इसके अच्छे नतीजे सामने होंगे।Ó इस गठजोड़ की संभावना नजर आयी मगर कुछ देर बाद ही फिरोजाबाद में दूसरे महासचिव व 'थिंक टैंकÓ प्रो.राम गोपाल यादव ने गठजोड़ के प्रयासों पर ब्रेक लगाते हुए कहा कि 'राजनीति व समाज में जिसकी विश्वसनीयता खत्म हो जाती है, उससे गठजोड़ नहीं हो सकता।Ó इशारा रालोद की ओर था। उनकी टिप्पणी को सपा-रालोद गठजोड़ के प्रयासों पर ब्रेक के तौर पर देखा जा रहा है। दो महासचिवों के परस्पर विपरीत दिशा वाले बयान के निहितार्थ तलाशे जा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषक सपा में एक साथ कई वैचारिक धाराओं का उभार देख रहे हैं।
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पहले भी लगाया 'ब्रेकÓ
इससे पहले भी शिवपाल यादव ने 'जनता परिवारÓ को एक मंच पर खड़ा करने का प्रयास किया था और मुलायम सिंह यादव को जनता परिवार का मुखिया चुन लिया गया, मगर बिहार विधानसभा के चुनाव से पहले प्रो.राम गोपाल ने समाजवादी पार्टी के जनता परिवार से अलग होने की घोषणा कर दी और अपने बूते बिहार में चुनाव लडऩे का फैसला किया था।
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मगर जोखिम भी
जिन सौ विधानसभा सीटों को पश्चिम उत्तर प्रदेश का हिस्सा माना जाता है उनमें से चालीस पर समाजवादी पार्टी का कब्जा है, इस इलाके में साइकिल की रफ्तार तेज करने के लिए मुस्लिम और जाट दोनों के वोटों की ज़रूरत होगी। मगर मुजफ्फरनगर समेत पश्चिम के जिन जिलों फसाद हुआ है, वहां कई बार जाट-मुस्लिम ही आमने सामने रहे हैं, ऐसे में गठजोड़ जोखिम का भी सौदा हो सकता है। सूत्रों का कहना है कि रामगोपाल यादव ने जिस तरह से इस गठजोड़ के प्रयासों पर ब्रेक लगाया है, उससे अब गाड़ी आगे बढऩे की संभावना कम ही है।
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'राजनीति व समाज में जिसकी विश्वसनीयता खत्म हो जाती है, उससे गठजोड़ नहीं हो सकता।Ó प्रो.रामगोपाल यादव, महासचिव समाजवादी पार्टी (फिरोजाबाद में)
लखनऊ : विधानसभा चुनाव से पूर्व भाजपा के खिलाफ रालोद (राष्ट्रीय लोकदल) के साथ गठबंधन की समाजवादी पार्टी (सपा) महासचिव शिवपाल यादव की पहली कोशिश पर ही दूसरे महासचिव प्रो.रामगोपाल यादव ने 'ब्रेकÓ लगा दिया है। यह पहल थमने की संभावना है। सपा महासचिवों की मुख्तलिफ राह के सियासी निहितार्थ ढूंढे जा रहे हैं।
रालोद लोकसभा चुनाव में खाता नहीं खुलने के 'दर्दÓ से परेशान है तो समाजवादी पार्टी विधानसभा-2017 से पहले ताकत में बढ़ोत्तरी की फिराक में है। सूत्रों का कहना है कि कुछ दिन पहले एक धर्मगुरु ने दोनों दलों के गठजोड़ का मंत्र दिया तो सपा महासचिव शिवपाल यादव ने अमल शुरू किया। पार्टी मुखिया मुलायम सिंह से गठजोड़ के नफा-नुकसान पर चर्चा की और माना गया कि गठजोड़ से जाट-मुस्लिम गोलबंदी में कामयाबी मिल सकती है।
सपा नेताओं की आपसी चर्चा के बाद रविवार को रालोद अध्यक्ष अजित सिंह मुलायम सिंह से मिलने दिल्ली स्थित उनके आपास पर पहुंचे। जहां उनकी राज्य की सियासी संभावनाओं पर चर्चा हुई। इस दौरान सपा महासचिव शिवपाल सिंह यादव, एमएलसी आशु मलिक भी मौजूद रहे।
एक दशक से भी अधिक समय के बाद सियासी कारणों से मुलायम-अजित मुलाकात में जिन बिन्दुओं पर चर्चा हुई, उसका दोनों ओर से खुलासा नहीं किया। शिवपाल यादव ने जरूर कहा कि किसानों की समस्या से लेकर कई मुद्दों पर चर्चा हुई है, परिणाम सामने आयेगा। इससे सपा के समर्थन से अजित सिंह को राज्यसभा भेजे जाने के कयास लगे, मगर रालोद ने खामोशी ओढ़े रखी। सोमवार को विकास योजनाओं की समीक्षा करने संभल पहुंचे शिवपाल यादव ने कहा कि 'रालोद मुखिया अजित सिंह से बातचीत सकारात्मक रही, इसके अच्छे नतीजे सामने होंगे।Ó इस गठजोड़ की संभावना नजर आयी मगर कुछ देर बाद ही फिरोजाबाद में दूसरे महासचिव व 'थिंक टैंकÓ प्रो.राम गोपाल यादव ने गठजोड़ के प्रयासों पर ब्रेक लगाते हुए कहा कि 'राजनीति व समाज में जिसकी विश्वसनीयता खत्म हो जाती है, उससे गठजोड़ नहीं हो सकता।Ó इशारा रालोद की ओर था। उनकी टिप्पणी को सपा-रालोद गठजोड़ के प्रयासों पर ब्रेक के तौर पर देखा जा रहा है। दो महासचिवों के परस्पर विपरीत दिशा वाले बयान के निहितार्थ तलाशे जा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषक सपा में एक साथ कई वैचारिक धाराओं का उभार देख रहे हैं।
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पहले भी लगाया 'ब्रेकÓ
इससे पहले भी शिवपाल यादव ने 'जनता परिवारÓ को एक मंच पर खड़ा करने का प्रयास किया था और मुलायम सिंह यादव को जनता परिवार का मुखिया चुन लिया गया, मगर बिहार विधानसभा के चुनाव से पहले प्रो.राम गोपाल ने समाजवादी पार्टी के जनता परिवार से अलग होने की घोषणा कर दी और अपने बूते बिहार में चुनाव लडऩे का फैसला किया था।
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मगर जोखिम भी
जिन सौ विधानसभा सीटों को पश्चिम उत्तर प्रदेश का हिस्सा माना जाता है उनमें से चालीस पर समाजवादी पार्टी का कब्जा है, इस इलाके में साइकिल की रफ्तार तेज करने के लिए मुस्लिम और जाट दोनों के वोटों की ज़रूरत होगी। मगर मुजफ्फरनगर समेत पश्चिम के जिन जिलों फसाद हुआ है, वहां कई बार जाट-मुस्लिम ही आमने सामने रहे हैं, ऐसे में गठजोड़ जोखिम का भी सौदा हो सकता है। सूत्रों का कहना है कि रामगोपाल यादव ने जिस तरह से इस गठजोड़ के प्रयासों पर ब्रेक लगाया है, उससे अब गाड़ी आगे बढऩे की संभावना कम ही है।
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